Маро ба ҷузи ғами вҳсрти зи ишқи ёр чаҳ ҳосил
مرا به جز غم وحسرت ز عشق یار چه حاصل
Ба ғайри ҳайрату ғифлат ба рӯзгор чаҳ ҳосил
به غیر حیرت و غفلت به روزگار چه حاصل
Ту ро ба нашъа ҳастӣ ба ғайри марг чаҳ сарфа
تو رابه نشئه هستی به غیر مرگ چه صرفه
Буд зи бодау мастӣ ба ҷузи хумор чаҳ ҳосил
بود ز باده و مستی به جز خمار چه حاصل
Гирифтам ин ки супурдам ба дасти лолаи рухони дил
گرفتم این که سپردم به دست لاله رخان دل
Сўои хӯни дилу чашми ашкбор чаҳ ҳосил
سوای خون دل و چشم اشکبار چه حاصل
Дар ин диёр надидем дилбарӣ ки баради дил
در این دیار ندیدیم دلبری که برد دل
Дигар таваққуфи мо андари ин диёр чаҳ ҳосил
دگر توقف ما اندر این دیار چه حاصل
Касе ки солу ма умр ӯст баҳмани вдии ма
کسی که سال و مه عمر اوست بهمن ودی مه
Чу фурӯдин расад вФсли навбаҳор чаҳ ҳосил
چو فرودین رسد وفصل نوبهار چه حاصل
Хазони ҳавои втмошоӣ боғ дода чаҳ лиззат
خزان هوا وتماشای باغ داده چه لذت
Чу рафт гули зи гулистони зи сайри хор чаҳ ҳосил
چو رفت گل ز گلستان ز سیر خار چه حاصل
Ҳар онкии омадаи иқбол ӯ блндбаҳи олам
هر آنکه آمده اقبال او بلندبه عالم
Набошад арчўмни хастаи хоксор чаҳ ҳосил
نباشد ارچومن خسته خاکسار چه حاصل