Равшани чароғ кас накунад пеши офтоб

روشن چراغ کس نکند پیش آفتاب

эй офтоби пеши рухи моҳи ман мтоб

ای آفتاب پیش رخ ماه من متاب

Гуфторнигор ман ки ба хоби оимти шабӣ

گفتار نگار من که به خواب آیمت شبی

Охири шабии чўбхти ман эй чашм ман бихоб

آخر شبی چوبخت من ای چشم من بخواب

Чашмам чу лола гашта фишонд зи бскаҳи ашк

چشمم چو لاله گشته فشاند ز بسکه اشک

Нагирифта каси зи лола чу ман токунӯн гулоб

نگرفته کس ز لاله چو من تاکنون گلاب

Зоҳид мабанд тӯҳмати мастии з май ба ман

زاهد مبند تهمت مستی ز می به من

Ман масти чашми мастнигорам на аз шароб

من مست چشم مست نگارم نه از شراب

Чун печи втоби зулфи тўбинм гумон кунам

چون پیچ وتاب زلف توبینم گمان کنم

Марӣаст захмдор ки бошад ба печи втоб

ماری است زخمدار که باشد به پیچ وتاب

Вайронаи шӯ ки қобили таъмир май шӯй

ویرانه شو که قابل تعمیر می شوی

Обод кӣ шӯй нашӯй эй дил ар хароб

آباد کی شوی نشوی ای دل ار خراب

То чндмҳўи наҳви вкнии умри сарфи сарф

تا چندمحو نحو وکنی عمر صرف صرف

Бархез эй мударриси вбрҳми бунаи китоб

برخیز ای مدرس وبرهم بنه کتاب

Иқбол ҳар касе шудааст аз раҳеи баланд

اقبال هر کسی شده است از رهی بلند

Иқболи ман баланд шуд аз ишқи Бутуроб

اقبال من بلند شد از عشق بوتراب

Надорам сирӣ аз он лаъли сероб

ندارم سیری از آن لعل سیراب

Ки мстсқӣ надорад сирӣ аз об

که مستسقی ندارد سیری از آب

Лабати савдои моро карда афзӯн

لبت سودای ما را کرده افزون

Ки гуяд рафъ савдо карда унноб

که گوید رفع سودا کرده عناب

Дилами тоқат ба дидорат наёрад

دلم طاقت به دیدارت نیارد

Ки каттонро набошад тоби маҳтоб

که کتان را نباشد تاب مهتاب

Ба паҳлу бетўгўӣӣ хор дорам

به پهلو بی توگوئی خار دارم

Кунамгар бистари ваболин зи санҷоб

کنم گر بستر وبالین ز سنجاب

Баланд иқбол кун сабр аз ғами ҳиҷр

بلند اقبال کن صبر از غم هجر

Ки охир ғӯра мегардад май ноб

که آخر غوره می گردد می ناب