Чун гашти тамоми кори ошиқ

چون گشت تمام کار عاشق

Аз васл ба сӯрати мувофиқ

از وصل به صورت موافق

Ин назм ки буд дар беонаш

این نظم که بود در بیانش

Дар хотимаи гашти ҳам анонаш

در خاتمه گشت هم‌عنانش

Чун дид хирад ки ин кавокиб

چون دید خرد که این کواکب

Аз бурҷи замири гашти соқиб

از برج ضمیر گشت ثاقب

Венаи бикри баён ниқоб багушӯд

وین بکر بیان نقاب بگشود

Вази ҳиҷлаи дил ҷамол бинмуд

وز حجله دل جمال بنمود

Гуфт ин санами бадеъи манзар

گفت این صنم بدیع‌منظر

Венаи моҳи рухи латифи пайкар

وین ماه‌رخ لطیف‌پیکر

Манзӯмаи гавҳари маъонӣ

منظومۀ گوهر معانی

Дебоча нома амоне

دیباچۀ نامۀ امانی

Мсдўқаҳи ҳоли дардмандон

مصدوقۀ حال دردمندان

Маҷмӯъаи рози мустамандон

مجموعۀ راز مستمندان

Ин шамъ ки хотир ту афрӯхт

این شمع که خاطر تو افروخت

Венаи ганҷ ки фикрат ту андӯхт

وین گنج که فکرت تو اندوخت

Ин дар гарони баҳо ки сифтӣ

این در گران‌بها که سفتی

Венаи қиссаи ҷони Фзо ки гуфтӣ

وین قصۀ جان‌فزا که گفتی

Шояд ки ба об зар нависанд

شاید که به آب زر نویسند

Бар сафҳаи моҳ ва хур нависанд

بر صفحۀ ماه و خور نویسند

Алқсаҳи маи рабиъи алаввал

القصه مَهِ رَبیعُ‌الاَول

Ин назм бадеъ шуд мукаммал

این نظم بدیع شد مکمل

Дар ҳафтсад ва шаст байти ғро

در هفتصد و شصت بیت غرا

Чун турраи дилбарони мтро

چون طرۀ دلبران مطرا

Назмӣ на ки чанд дона дар

نظمی نه که چند دانۀ دُر

Шуд суфта ба мҳбти тафаккур

شد سفته به مهبط تفکر

Манзуми басони ақди парвин

منظوم بسان عقد پروین

Мавсӯм ба « равзаи алмҳбин »

موسوم به «رَوضَةُ ‌المُحِّبین»

Аз муддати ҳиҷрати Муҳамад

از مدت هجرت محمد

Рафтаи навад ва чаҳору ҳФсд

رفته نود و چهار و هفصد