Дило чу шева ӣ риндӣ намеравад аз пеш

دلا چو شیوه ی رندی نمی رود از پیش

Биҷавии ганҷи саломати зи кунҷи хона ӣ хеш

بجوی گنج سلامت ز کُنج خانه ی خویش

Чаҳ шикваҳо ки надорам зи дасти нӯши лабон

چه شکوه ها که ندارم ز دست نوش لبان

Ки нӯш мендиҳанду ҳамеи знндми неш

که نوش می ندهند و همی زنندم نیش

Чу хор найза шуд ин душманони таънаи гузор

چو خار نیزه شد این دشمنان طعنه گذار

Чу гули ду равия шуд ин дӯстони душмани кеш

چو گل دو رویه شد این دوستان دشمن کیش

Ба зери хирқа чаҳ зуннорҳо ки пинҳон аст

به زیر خرقه چه زنّارها که پنهان است

Фиғони зи шева ӣ ин суфиёни нои дарвеш

فغان ز شیوه ی این صوفیان نا درویش

Ҷароҳати дили мо гар намекунӣ марҳам

جراحت دل ما گر نمی کنی مرهم

Равои мадор фишондани намаки маро бар риш

روا مدار فشاندن نمک مرا بر ریش

Тариқ агар ба сиёҳӣастгар ба оби ҳаёт

طریق اگر به سیاهی است گر به آب حیات

Хаёли зулфу лабат май раванди пешопеш

خیال زلف و لبت می روند پیشاپیش

Тасаввурӣ ки ба васл ту дорад ибни ҳисом

تصوری که به وصل تو دارد ابن حسام

Бурун намеравадаш зини дили маҳоли андеш

برون نمی رودش زین دل محال اندیش