Бирафтӣ аз назар ва аз назар нарафт хаёл

برفتی از نظر و از نظر نرفت خیال

Ба ифтироқ мубаддил шуд иттифоқи висол

به افتراق مبدّل شد اتفاق وصال

Тасаввурӣ ба сабурии хаёл май бандам

تصوری به صبوری خیال می بندم

Зиҳии тасаввури ботили зиҳии хаёли маҳол

زهی تصور باطل زهی خیال محال

Ба дасти боди сабои буии зулф худ бифирист

به دست باد صبا بوی زلف خود بفرست

Магар ба ҳол худ ояд дили парешони ҳол

مگر به حال خود آید دل پریشان حال

Маро чаҳ суд ки домани зи об дар чинам

مرا چه سود که دامن ز آب در چینم

Ки ҳаст домани ман зи оби дидаи моломол

که هست دامن من ز آب دیده مالامال

Кабӯтари ҳарами садри сина яъне дил

کبوتر حرم صدر سینه یعنی دل

Ба доми зулф ту омад ба майли донаи хол

به دام زلف تو آمد به میل دانهٔ خال

Маро ки соҳиби ҳолам ба маърифат бишнос

مرا که صاحب حالم به معرفت بشناس

Чаро ки муъаррифа бояд ба воҷибии зўолҳол

چرا که معرفه باید به واجبی ذوالحال

Даруни равзанаи ҷон чу офтоб битоб

درون روزنهٔ جان چو آفتاب بتاب

Ки дар ҳавои ту саргаштаем зарраи мисол

که در هوای تو سرگشته‌ایم ذره‌مثال

Камоли ҳасани ту чун барқи лмъаҳ Эй бинмуд

کمال حسن تو چون برق لُمعه ای بنمود

Бсухт ибни ҳисом аз таҷаллӣоти ҷамол

بسوخت ابن حسام از تجلّیات جمال

Маро расад ки кунам даъвии камоли сухан

مرا رسد که کنم دعوی کمال سخن

Аз он ҷиҳат ки расонами сухан ба ҳади камол

از آن جهت که رسانم سخن به حدّ کمال