Дилам ба чашм ту омад ба дудмони сиёҳ

دلم به چشم تو آمد به دودمان سیاه

Ҳазар накард ҳамоно зи хону мони сиёҳ

حذر نکرد همانا ز خان و مان سیاه

зи қайди зулфи ту парҳез мекунад дили ман

ز قید زلف تو پرهیز می کند دل من

Чунонкии мори гузидаи зи ресмони сиёҳ

چنانکه مار گزیده ز ریسمان سیاه

Забон бурид қалами рози ман ҳувайдо кард

زبان برید قلم راز من هویدا کرد

Сараши бурӣда ки дар ман кашад забони сиёҳ

سرش بریده که در من کشد زبان سیاه

Фиғон ки савмиъаи гирони дўрнгу зроқнд

فغان که صومعه گیران دورنگ و زّراقند

Ба дръаҳҳои сифед ва ба тилсони сиёҳ

به درعه های سفید و به طیلسان سیاه

Шабии дароз ба бояд ки ман бипардозам

شبی دراز به باید که من بپردازم

Шикояти сари зулфи ту бо шубони сиёҳ

شکایت سر زلف تو با شبان سیاه

Чу хати сабз ту бигирифт тарафи чашмаи нӯш

چو خط سبز تو بگرفت طرف چشمه نوش

Хизр ба об ҳаётамад аз макони сиёҳ

خضر به آب حیات امد از مکان سیاه

Нишони холи ту бар дили нигошти ибни ҳисом

نشان خال تو بر دل نگاشت ابن حسام

Ки ҳаргизаши мрўод аз дили он нишони сиёҳ

که هرگزش مرواد از دل آن نشان سیاه