Бар гирди маи зи ғолияи паргор май кашӣ

بر گرد مه ز غالیه پرگار می‌کشی

Бар тарафи рӯзи нақши шаби тор май кашӣ

بر طرف روز نقش شب تار می‌کشی

Он рӯз шуд ки рози ниҳони доштам ки боз

آن روز شد که راز نهان داشتم که باز

Розам чу рӯз бар сари бозор май кашӣ

رازم چو روز بر سر بازار می‌کشی

Зуннори зулфи оташи ишқат бало шуданд

زنار زلف آتش عشقت بلا شدند

Зини боз май кашӣ ва ба зуннор май кашӣ

زین باز می کُشی و به زنَّار می‌کَشی

Дил чанд гуҳи зи фитнаи чашми ту руста буд

دل چند گه ز فتنه چشم تو رسته بود

Бозаш ба доми турраи таррор май кашӣ

بازش به دام طُّرهٔ طَّرار می‌کشی

Зошўб чашм туаст ки ибни ҳисом ро

زآشوب چشم توست که ابن‌حسام را

Аз савмиъа ба хонаи хумор май кашӣ

از صومعه به خانه خمّار می‌کشی