Хуштар зи остони ту моро мақом нест

خوشتر ز آستان تو ما را مقام نیست

Кӯии ту кам зи равза доруссалом нест

کوی تو کم ز روضهٔ دارالسلام نیست

Гуфтам ки хоки роҳи туам мултафит нашуд

گفتم که خاک راه توام ملتفت نشد

Бечораи ман ки ӣнқадарам эҳтиром нест

بیچاره من که اینقدرم احترام نیست

Гуфтам биё ки аз ғами лаъли ту сӯхтам

گفتم بیا که از غم لعل تو سوختم

Гуфт ин тамаъ ба ғайри таманноӣ хом нест

گفت این طمع به غیر تمنای خام نیست

Ойӣнаи вуҷӯд ки зангор ғам гирифт

آیینهٔ وجود که زنگار غم گرفت

Соқии сафоаши ҷуз ба май лаъл фом нест

ساقی صفاش جز به می لعل فام نیست

Май даҳ ки мӯҳтасиб накунад манъи шурби мо

می ده که محتسب نکند منع شرب ما

Оре ба базми соқии мо меҳаром нест

آری به بزم ساقی ما می حرام نیست

Сӯфӣ ки манъи бодаи софӣ ҳаме кунад

صوفی که منع باده صافی همی کند

ӯро хабари зи лиззати шурб мудом нест

او را خبر ز لذت شرب مدام نیست

Кардам ба сарви нисбати қадаш ба ғамза гуфт

کردم به سرو نسبت قدش به غمزه گفت

эй бебасар хамӯш ки ӯро хиром нест

ای بی بصر خموش که او را خرام نیست

Андӯҳи ёру дарди фироқу ғами диёр

اندوه یار و درد فراق و غم دیار

Охир бибин ки бар дили мо зин кадом нест

آخر ببین که بر دل ما زین کدام نیست

Ҳастанд бандагону ғуломони туро басӣ

هستند بندگان و غلامان تو را بسی

Як бандаи мутӣъ чу ибн ҳисом нест

یک بندهٔ مطیع چو ابن حسام نیست

Хониш
ғзл шморҳ 18 — дктр мҳмдълӣ рҳӣмӣ (хомвш)