Ҷузи хами зулфати дилам паноҳ надорад
جز خم زلفت دلم پناه ندارد
Ҷониби дилҳо чаро нигоҳ надорад
جانب دلها چرا نگاه ندارد
Кист ки аз тоби он ду сунбули мишкӣн
کیست که از تاب آن دو سنبل مشکین
Ҳамчуи бунафшаи қад дўтоаҳ надорад
همچو بنفشه قد دوتاه ندارد
Мардумӣ кун ки пеши чашми сиёҳат
مردمی کن که پیش چشم سیاهت
Хонаи мардуми чунин сиёҳ надорад
خانهٔ مردم چنین سیاه ندارد
Сина чун миҷмарами зи оташи ҳиҷрон
سینهٔ چون مجمرم ز آتش هجران
Ҷузи нафаси гарми ман гувоҳ надорад
جز نفس گرم من گواه ندارد
Номаи дардам ба дасти боди супурдам
نامهٔ دردم به دست باد سپردم
Лек сабо бар дар ту роҳ надорад
لیک صبا بر در تو راه ندارد
Дил ба сӯии майкадаи паноҳи азони барад
دل به سوی میکده پناه ازآن برد
Беш сари дарс хонақоҳ надорад
بیش سر درس خانقاه ندارد
зи ибни ҳисом аз чаҳ рӯй зулфи ту печид
ز ابن حسام از چه روی زلف تو پیچید
Доғ ту дорад ҷузин гуноҳ надорад
داغ تو دارد جزین گناه ندارد