Зиёда мекунад он чашми пурхумори хумор

زیاده می کند آن چشم پرخمار خمار

зи дили ҳамеи баради он зулф бе қарори қарор

ز دل همی برد آن زلف بی قرار قرار

Бахаст ғамзаи тези ту хонаи чашмам

بخست غمزهٔ تیز تو خانهٔ چشمم

Ки гуфт дидаи аҳли назар ба хори бухор

که گفت دیدهٔ اهل نظر به خار بخار

Чунон бсухт шарори ғами ту хирмани дил

چنان بسوخت شرار غم تو خرمن دل

Ки мерасад ба димоғам аз он шарори шарор

که می‌رسد به دماغم از آن شرار شرار

Дар интизори мудовим ба ваъдаи фардо

در انتظار مداوم به وعدهٔ فردا

Ки нест мумкини азин чарх бе мадори мадор

که نیست ممکن ازین چرخ بی‌مدار مدار

Бапуш рӯй ки сӯратнигор чини бабрад

بپوش روی که صورت نگار چین ببرد

Намӯнае ки нигоранд аз он канори канор

نمونه‌ای که نگارند از آن کنار کنار

Ба боғи мазраъаи поки синаи ибни ҳисом

به باغ مزرعهٔ پاک سینه ابن‌حسام

Чу ҳаст тухми муҳаббати туро ба кори бакор

چو هست تخم محبت ترا به کار بکار