намебиёред ки айём баҳораст имрӯз

می بیارید که ایام بهار است امروز

Наргис аз соғари зари ҷуръа гусораст имрӯз

نرگس از ساغر زر جرعه گسار است امروز

Дидаи хуши назари боғ хумор олуд аст

دیدهٔ خوش نظر باغ خمار آلود است

Қадаҳи лолаи пар аз нӯш гўораст имрӯз

قدح لاله پر از نوش گوار است امروز

Ҳам насими чаман аз боғ бихӯр ангез аст

هم نسیم چمن از باغ بُخور انگیز است

Ҳам шамеми саҳарии миҷмара дораст имрӯз

هم شمیم سحری مجمره دار است امروز

Гули хушбӯӣ нишон медиҳад аз талъати дӯст

گل خوشبوی نشان می‌دهد از طلعت دوست

Сарви дилҷӯии ту гӯйии қад ёраст имрӯз

سرو دلجوی تو گویی قد یار است امروز

Чаман аз лола ва аз сунбултар пиндорӣ

چمن از لاله و از سنبل تر پنداری

Рост монанди руху зулф нигораст имрӯз

راست مانند رخ و زلف نگار است امروز

Дай гузар кард ндонем ба фардо ки расад

دی گذر کرد ندانیم به فردا که رسد

Ҳайф аз ин лаҳза ки дар айн гузораст имрӯз

حیف از این لحظه که در عین گذار است امروز

Дар чунин фасл ки гуфтам сухани ибни ҳисом

در چنین فصل که گفتم سخن ابن حسام

Аз лаби мутриби хуши лаҳҷа ба кораст имрӯз

از لب مطرب خوش لهجه به کار است امروز