Зӯҳҳоду аҷабу гӯшаи миҳробу кори хеш
زهّاد و عُجب و گوشهٔ محراب و کار خویش
Моу ниёзи қиблаи абрӯии ёри хеш
ما و نیاز قبلهٔ ابروی یار خویش
Моро насими турраи хубон ба бод дод
ما را نسیم طرّهٔ خوبان به باد داد
Ҳон то ба бод бар надиҳӣ рӯзгори хеш
هان تا به باد بر ندهی روزگار خویش
Моро чаҳ ихтиёр агар бахт ёр нест
ما را چه اختیار اگر بخت یار نیست
Оре ба ихтиёр кашад Бахтиёри хеш
آری به اختیار کشد بختیار خویش
Гуфтам ки ҷони нисор ту кардам қабул кун
گفتم که جان نثار تو کردم قبول کن
Гуфто ки чашм нест маро бар нисори хеш
گفتا که چشم نیست مرا بر نثار خویش
Бо хоки остона чу кардӣ баробарам
با خاک آستانه چو کردی برابرم
Сар бар фалак кашидаам аз эътибори хеш
سر بر فلک کشیدهام از اعتبار خویش
Ман сайди лоғарам ба каманди ту пои банд
من صید لاغرم به کمند تو پایبند
Бигушоӣ даст ва рӯй мтобши шикори хеш
بگشای دست و روی متابَش شکار خویش
Соқӣ май сабӯҳ ба ибни ҳисоми даҳ
ساقی می صبوح به ابن حسام ده
Башикан хумор ӯ ба май хушгувори хеш
بشکن خمار او به می خوشگوار خویش