Лабу дандони ту бо лаъл ва гуҳар ме монад
لب و دندان تو با لعل و گهر میماند
Зулфу рухсори ту бо шом ва саҳар ме монад
زلف و رخسار تو با شام و سحر میماند
Ҳасани рухсори қамар гар набадӣ ориятӣ
حسن رخسار قمر گر نبدی عاریتی
Гуфтамӣ партави рӯят ба қамар ме монад
گفتمی پرتو رویت به قمر میماند
Ҷазаъ дар бори ман аз орзӯии лаъли лабат
جزع در بار من از آرزوی لعل لبت
Рӯзу шаб бо садафии пари з гуҳар ме монад
روز و شب با صدفی پر ز گهر میماند
Чеҳра манимоӣ ба душман ки зи захми назараш
چهره منمای به دشمن که ز زخم نظرش
Бар рухи нозукат эй дӯст асар ме монад
بر رخ نازکت ای دوست اثر میماند
Чашми ман дар ғами ту чун сипари афканд бар об
چشم من در غم تو چون سپر افکند بر آب
Наргисии байн ки ба нилӯфар тар ме монад
نرگسی بین که به نیلوفر تر میماند
Гуфта будӣ ки зи дасти ғами ман ҷон набарӣ
گفته بودی که ز دست غم من جان نبری
Набарам ҷони бабрами ҳеҷ дигар ме монад
نبرم جان ببرم هیچ دگر میماند
Ҳар ки по дар раҳи ишқат чу ман аз сидқи ниҳод
هر که پا در ره عشقت چو من از صدق نهاد
На ҳамоно ки дилаш дар ғам сар ме монад
نه همانا که دلش در غم سر میماند
Шӯри Фарҳоди куҷо кам шавад аз посухи талх
شور فرهاد کجا کم شود از پاسخ تلخ
Рӯи турш кардани ширин ба шукр ме монад
رو تُرُش کردن شیرین به شکر میماند
Сухани ибни ямин гарчи саросар гуҳар аст
سخن ابن یمین گرچه سراسر گهر است
Лекин аз гӯши ту чун ҳалқа ба дар ме монад
لیکن از گوش تو چون حلقه به در میماند