Баёзи ғамза рӯйу саводи турраи шаб

بیاض غمزه روی و سواد طره شب

з рӯй ва мӯӣ намӯд оннигор ширини лаб

ز روی و موی نمود آن نگار شیرین لب

Рахши сояи зулф андарун бидон монад

رخش سایه زلف اندرون بدان ماند

Ки офтоб дурахшон шавад миёнаи шаб

که آفتاب درخشان شود میانه شب

Кунам таҳаммули ҷаври рақибаш аз паии онк

کنم تحمل جور رقیبش از پی آنک

зи мори муҳра бадаст ояду зи хори рутаб

ز مار مهره بدست آید و ز خار رطب

Паём додам ва гуфтам ки сӯхти пайкари ман

پیام دادم و گفتم که سوخت پیکر من

зи меҳр рӯй ту чун аз фурӯғи моҳи қсб

ز مهر روی تو چون از فروغ ماه قصب

Ҷавоб дод ки ман моҳаму танат қсб аст

جواب داد که من ماهم و تنت قصب است

Қсби зи партави ма гар бсухт нест аҷаб

قصب ز پرتو مه گر بسوخت نیست عجب

Агар чаҳ он санами озарӣ халил манаст

اگر چه آن صنم آذری خلیل منست

Марои азоб чу намруд мекунад блҳб

مرا عذاب چو نمرود میکند بلهب

Биё ва бар лабами обии зани аимсиҳи нафас

بیا و بر لبم آبی زن ایمسیح نفس

Ки тоби меҳри ту мисўздм дар оташи таб

که تاب مهر تو میسوزدم در آتش تب

зи сар бурун накунам ҷустуҷӯат дар ҳамаи умр

ز سر برون نکنم جستجوت در همه عمر

Агар чаҳ дар таку пўими шикасти пои талаб

اگر چه در تک و پویم شکست پای طلب

Сафари зи кӯии ту ибни ямин чигуна кунад

سفر ز کوی تو ابن یمین چگونه کند

Ки бошад аз руху зулфи ту моҳ дар ақраб

که باشد از رخ و زلف تو ماه در عقرب