То дабдабаи ҳасан ту афтод дар офоқ

تا دبدبه حسن تو افتاد در آفاق

Наомад нафасии биғми дил бар лаби ушшоқ

نآمد نفسی بی غم دل بر لب عشاق

Муштоқи тавъами ҷуфти ғамами баҳр чаҳ дорӣ

مشتاق توأم، جفت غمم بهر چه داری

Дарёб ки шуд тоқи зғми тоқати муштоқ

دریاب که شد طاق، ز غم طاقت مشتاق

Дарди дили моро блби лаъл даво кун

درد دل ما را به لب لعل دوا کن

Дар ҷон чу расад заҳр чаҳ сӯи дасти зи трёқ

در جان چو رسد زهر، چه سودست ز تریاق

Дар сар ҳавасам ҳаст ки бо чун ту нигорӣ

در سر هوسم هست که با چون تو نگاری

Каз ғояти лутфат бадалӣ нест дар офоқ

کز غایت لطفت بدلی نیست در آفاق

Нӯшами дўсаҳ май ҷуз майу ҷузи ту дгарӣ на

نوشم دو سه می جز می و جز تو دگری نه

Май нӯш бад-инсон ва миндиш зи инфоқ

می نوش بدینسان و میندیش ز انفاق

Бо духтари рузи ҷуфт таматтуъ натавон шуд

با دختر رز جفت تمتع نتوان شد

То исмат ва тақво нанаҳй бар тарафи тоқ

تا عصمت و تقوی ننهی بر طرف طاق

Ман ибни яминам шуда машҳур барандӣ

من ابن یمینم شده مشهور به رندی

На зоҳиди солусам ва на сӯфии зроқ

نه زاهد سالوسم و نه صوفی زراق