Марҳабои аичшми ҷони равшани бнўри рои ту

مرحبا ایچشم جان روشن بنور رای تو

Дастгири дили гуҳи ошуфтагии гесуии ту

دستگیر دل گه آشفتگی گیسوی تو

Ҳар ки дид он мӯӣу рӯ дар куфр ва дар ислом гуфт

هر که دید آن موی و رو در کفر و در اسلام گفت

Субҳ исломасту шоми куфр рӯйу мӯии ту

صبح اسلام است و شام کفر روی و موی تو

Пеши шамъ рӯй ту меҳри фалаки парвонаи ист

پیش شمع روی تو مهر فلک پروانه ایست

Ҷуфт шуд моҳи нав аз тоқи хами абрӯии ту

جفت شد ماه نو از طاق خم ابروی تو

Офтоби нури бахшеи соя аз ман вомдор

آفتاب نور بخشی سایه از من وامدار

То шавам зарраи сифати андари ҳавои кӯии ту

تا شوم ذره صفت اندر هوای کوی تو

Бо дил шӯрида гуфтам бар сар хон умед

با دل شوریده گفتم بر سر خوان امید

Ҷузи ҷигари моро насибӣ нест аз паҳлавии ту

جز جگر ما را نصیبی نیست از پهلوی تو

Пеши тири ғамзаи хубони сипари гаштани зи ишқ

پیش تیر غمزه خوبان سپر گشتن ز عشق

Ва он камони болотрст аз қӯти бозуии ту

و آن کمان بالاترست از قوت بازوی تو

Гуфт к-эии ибни ямин аз ман мубини андӯҳи хеш

گفت کای ابن یمین از من مبین اندوه خویش

Дида меорад блоҳми сӯии ман ҳам сӯии ту

دیده میآرد بلاهم سوی من هم سوی تو