Шабии хаёли ту бар ман бсди даллоли гузашт
شبی خیال تو بر من بصد دلال گذشت
Ғуломи хобам аз оншб ки онхёли гузашт
غلام خوابم از آنشب که آنخیال گذشت
Бар омад аз ттқи ғайб чун ғизолаи зи меғ
بر آمد از تتق غیب چون غزاله ز میغ
Бмн намӯд рух аз давр ва чун ғизоли гузашт
بمن نمود رخ از دور و چون غزال گذشت
Чунон намӯд маро дар назари зи ғояти лутф
چنان نمود مرا در نظر ز غایت لطف
Ки пеши ташнаи ту гўӣии магари зулоли гузашт
که پیش تشنه تو گوئی مگر زلال گذشت
Бхоки пои ту кандар сифати нмиоид
بخاک پای تو کاندر صفت نمیآید
Ки бар серуми зғми ҳиҷри ту чаҳ ҳоли гузашт
که بر سرم زغم هجر تو چه حال گذشت
Шаби фироқи ту бо рӯз ҳашар ме монаст
شب فراق تو با روز حشر می مانست
Каз имтидоди зи панҷаи ҳазор соли гузашт
کز امتداد ز پنجه هزار سال گذشت
Умед ҳаст ки нуқсони пазирадами ғами дил
امید هست که نقصان پذیردم غم دل
Бидон далел ки аз ғояти камоли гузашт
بدان دلیل که از غایت کمال گذشت
Паём додам ва гуфтам зи ранҷи фурқати ту
پیام دادم و گفتم ز رنج فرقت تو
Ба лоғарии тани зори ман аз ҳилоли гузашт
به لاغری تن زار من از هلال گذشت
Азин сипас натавонад кашид ибни Яман
ازین سپس نتواند کشید ابن یمن
Балои ишқи ту каз ҳади эътидоли гузашт
بلای عشق تو کز حد اعتدال گذشت
Ҷавоб дод ки бонги намоз дар боқӣ
جواب داد که بانگ نماز در باقی
Нарафт агар чаҳ ки дерӣаст то балоли гузашт
نرفت اگر چه که دیریست تا بلال گذشت