Носири давлату дайни шоҳи Абубакри алӣ

ناصر دولت و دین شاه ابوبکر علی

Ки баҳоли дили меҳнати каши мо боз расад

که بحال دل محنت کش ما باز رسد

Шак надорам ки бмн аз пас ин мкрмтш

شک ندارم که بمن از پس این مکرمتش

Чун азин пеши сад икром ва сад эъзоз расад

چون ازین پیش صد اکرام و صد اعزاز رسد

Дили дарёи сифат ӯ чу занад мавҷи сахо

دل دریا صفت او چو زند موج سخا

эй басо дар ки бадасти أмл ва оз расад

ای بسا در که بدست أمل و آز رسد

Нарасад абри баҳории бкФши вақти ато

نرسد ابر بهاری بکفش وقت عطا

Бумро ҳиммати он кӯ ки бшҳбоз расад

بوم را همت آن کو که بشهباز رسد

Ваъдаи ӣии ибни яминро з карам фармудаст

وعده ئی ابن یمین را ز کرم فرمودست

Вақт инаст ки он ваъда бонҷоз расад

وقت اینست که آن وعده بانجاز رسد