Дигар рӯзи оби шаб ки чархи баланд

دگر روز آب شب که چرخ بلند

Ҷаҳонро радои шаб азтн фиканд

جهان را ردای شب ازتن فکند

Ҳавои дами зрхшони рухи ҳўрзд

هوا دم زرخشان رخ هورزد

Сар аз кӯҳсори оташ тавр зад

سر از کوهسار آتش طور زد

Саворӣ падед омад аз гирди роҳ

سواری پدید آمد از گرد راه

Ба назд умр рафт он рӯи сиёҳ

به نزد عمر رفت آن رو سیاه

Яке нома додаш зобни зиёд

یکی نامه دادش زابن زیاد

Бхўондш чу он римни пурфасод

بخواندش چو آن ریمن پرفساد

Бидид онкии бнгоштаҳи аҳриман

بدید آنکه بنگاشته اهرمن

Ки кардам аз инат сронҷмн

که کردم از اینت سرانجمن

Ки баргирӣ аз тани сршҳрёр

که برگیری از تن سرشهریار

Фиристӣ бар ман ба Кӯфаи диёр

فرستی بر من به کوفه دیار

Наҳаштум дигар узри баҳри ту ман

نهشتم دگر عذر بهر تو من

Ба фармонат кардам сипоҳии кшн

به فرمانت کردم سپاهی کشن

Барон бош то онкӣ ҳар субҳу шом

برآن باش تا آنکه هر صبح و شام

Ба сӯии ман аз худ расонии паём

به سوی من از خود رسانی پیام

Ба пӯр паямбар бабанд об ро

به پور پیمبر ببند آب را

Бикаш ташнаи лаби шоҳу асҳоб ро

بکش تشنه لب شاه و اصحاب را

Мҳли рухи сӯии об ширин ниҳанд

مهل رخ سوی آب شیرین نهند

Ки то ҷони ширин ба талхӣ диҳанд

که تا جان شیرین به تلخی دهند

Ситамгар чу бар хонд он нома ро

ستمگر چو بر خواند آن نامه را

Нави оииин кин кард ҳангома ро

نو آییین کین کرد هنگامه را

Ба ъмрўобни ҳуҷҷоҷи нопокзод

به عمروابن حجاج ناپاکزاد

Ҳазорӣ чаҳор азсўорон бидод

هزاری چهار ازسواران بداد

Ки бар оли пайғамбару пайравон

که بر آل پیغمبر و پیروان

Бабанданд аз кӣнаи оби равон

ببندند از کینه آب روان

Чунон кард Амри бен ҳуҷҷоҷи кор

چنان کرد عمرو بن حجاج کار

Ки фармудаш аҳрӣмани нобакор

که فرمودش اهریمن نابکار

Спҳро ба ҳам бишиканади чанбарат

سپهرا به هم بشکند چنبرت

Фитад афсари меҳру моҳ аз сарат

فتد افسر مهر و ماه از سرت

Ба оли набии кин фузудан чаро ?

به آل نبی کین فزودن چرا؟

Ба коми бади андеш бӯдан чаро ?

به کام بد اندیش بودن چرا؟

Дадонро гўорндаҳи оби равон

ددان را گوارنده آب روان

Лаби ташнаи шерони яздони навон

لب تشنه شیران یزدان نوان

Ба ҳам башиканӣ боли товуси боғ

به هم بشکنی بال طاووس باغ

Ки гардад стоки калони ҷои зоғ

که گردد ستاک کلان جای زاغ

Ба грдндии хеш чун душманӣ ?

به گردندی خویش چون دشمنی؟

Ба яздони паноҳам ки аҳрӣманӣ

به یزدان پناهم که اهریمنی

Ту додӣ бисоти сулаймон ба ёд

تو دادی بساط سلیمان به یاد

Азин пас ману меҳри ту ин мабод

ازین پس من و مهر تو این مباد

Сӯии об бастан чу душмани шитофт

سوی آب بستن چو دشمن شتافت

Ба ёрони шаҳи тишнагӣ даст ёфт

به یاران شه تشنگی دست یافت

Яке теша бигирифт дасти худоӣ

یکی تیشه بگرفت دست خدای

Ба пушти саропардаи он раҳнамоӣ

به پشت سراپرده آن رهنمای

Сӯй қибла биниҳод на гоми зуд

سوی قبله بنهاد نه گام زود

Заминро бидон тешаи лухтии шхўд

زمین را بدان تیشه لختی شخود

Биҷӯшед азомри ҷони офарин

بجوشید ازامر جان آفرین

Яке жарфи чашмаи дарони сарзамин

یکی ژرف چشمه درآن سرزمین

Шаҳаншоҳу ёрони фаррухи табор

شهنشاه و یاران فرخ تبار

Бихӯраданд аз он оби ширини гўор

بخوردند از آن آب شیرین گوار

Намуданд сероби асбу шутур

نمودند سیراب اسب و شتر

Сипас машкҳо зоб карданд пар

سپس مشک ها زآب کردند پر

Чу бигузашт лухтии зи чашми ҷаҳон

چو بگذشت لختی ز چشم جهان

Шуд он чашма чун оби ҳайвони ниҳон

شد آن چشمه چون آب حیوان نهان