Шабати зи баҳр чаҳ бар рӯзи соябони андохт

شبت ز بهر چه بر روز سایبان انداخت

Ки рӯзи ман ба шаби тира дар гумони андохт

که روز من به شب تیره در گمان انداخت

Ки дод ҷузи руху зулфати нишони рӯзу шабӣ

که داد جز رخ و زلفت نشان روز و شبی

Ки он барӣни шикан ва ин гиреҳ бар он андохт

که آن براین شکن و این گره بر آن انداخت

Ду зулфи пари гиреҳатгар нигаҳ кунӣ ду шабанд

دو زلف پر گرهت گر نگه کنی دو شبند

Ки рӯз рӯй ту худро дар он миёни андохт

که روز روی تو خود را در آن میان انداخت

Шигифт мондаам аз чашми ҷодӯии ту ки чун

شگفت مانده ام از چشم جادوی تو که چون

Ба ним рӯзи гиреҳ дар шабии чунон андохт

به نیم روز گره در شبی چنان انداخت

Басо ки рӯз бшб кардам аз ғамат ки рахт

بسا که روز بشب کردم از غمت که رخت

Нагуфт соя бар он нотавон , тавон андохт

نگفت سایه بر آن ناتوان، توان انداخت

Бурузи ман мншиноди чашмат арча дилам

بروز من منشیناد چشمت ارچه دلم

Бабрад ва дар шикани зулфи длстони андохт

ببرد و در شکن زلف دلستان انداخت

Ҳазор ҷони имомии фидои он шабу рӯз

هزار جان امامی فدای آن شب و روز

Ки васф ҳар дуаш оташ дар устихони андохт

که وصف هر دو اش آتش در استخوان انداخت