Дидаи ақл аз адрокҳқиқти ишқ маҳҷӯбаст ақлро қӯт дид нур ишқ набошад зеро ки ишқ дар мартабаи моўроء ақласт ва худ дар таврии дигари ақлро қӯти идрок ӯ натавонад буд ишқ дарӣаст дар садафи ҷони ниҳону ҷон дар дарёии қазо ғўс карда , ақл бар соҳили дарёии қазо мутаваққиф мешавад ва аз хавфи наҳангони балои қадами пеши натавонади ниҳод . эй дарвеши ақли устоди мактаби маош ва маъодаст агар қадами дарин мактаб наад атфоли ин мактаби бомўхтни абҷади ишқ дар кораши оранд азизӣ гуфтааст :
دیدۀ عقل از ادراکحقیقت عشق محجوب است عقل را قوت دید نور عشق نباشد زیرا که عشق در مرتبۀ ماوراء عقل است و خود در طوری دیگر عقل را قوت ادراک او نتواند بود عشق دریست در صدف جان نهان و جان در دریای قضا غوص کرده، عقل بر ساحل دریای قضا متوقف میشود و از خوف نهنگان بلا قدم پیش نتواند نهاد. ای درویش عقل استاد مکتب معاش و معاد است اگر قدم درین مکتب نهد اطفال این مکتب بآموختن ابجد عشق در کارش آرند عزیزی گفته است:
Абҷади ишқат чу биёмухтам
ابجد عشقت چو بیاموختم
Перҳани меҳнат ва ғам дӯхтам
پیرهن محنت و غم دوختم
Кори ғамати ҳам зи ғамати сохтам
کار غمت هم ز غمت ساختم
Доми ғамати ҳам з ғам андӯхтам
دام غمت هم ز غم اندوختم
Ҳосили ишқати се сухан беш нест
حاصل عشقت سه سخن بیش نیست
Сӯхтам ва сохтаму тўхтм
سوختم و ساختم و توختم