Дар зоҳир чунонаст ки илми мӯҷиби лиззати куллӣ буд ва ҳукамо гуфтаанд ки идроки мӯҷиби лиззат буд , дар ишқи он қоида мунъакис мешавад зеро ки ниҳояти қадами рўндгони ин роҳ онаст ки қиллати истеъдоди худ аз адами вусӯл ихтиёр кунанду ҳақиқати вуҷӯдро ва он мӯҷиби ?илам бениҳоят буд ва агар илми бҳд камол расад бидонад ки ошиқро идроки ҷамоли маъшӯқи алии сиблати алкулӣа мумкин набӯд зеро ки дар роҳи номутаноҳии бқдм тноҳӣ меравад пас вусӯли амҳли алмҳолот ( кзо ) буду илми бад-ӣни мӯҷиби ақўии алолом буд на мурда на зиндаи лоямути фӣҳо влоиҳиӣ .
در ظاهر چنانست که علم موجب لذت کلی بود و حکما گفتهاند که ادراک موجب لذت بود، در عشق آن قاعده منعکس میشود زیرا که نهایت قدم روندگان این راه آنست که قلت استعداد خود از عدم وصول اختیار کنند و حقیقت وجود را و آن موجب الم بی نهایت بود و اگر علم بحد کمال رسد بداند که عاشق را ادراک جمال معشوق عَلی سَبیلِ الْکُلَّیة ممکن نبود زیرا که در راه نامتناهی بقدم تناهی میرود پس وصول اَمْحَلُ الْمُحالاتْ (کذا) بود و علم بدین موجب اَقْوی الْالام بود نه مرده نه زنده لایَمُوتُ فیها وَلایَحْیی.