Ки танг дӯхт ъФии аллоҳи қабои танги туро
که تنگ دوخت عفی الله قبای تنگ تو را
Ки дод зеб дигар сарви лолаи ранги туро
که داد زیب دگر سرو لاله رنگ تو را
Мусаввирӣ ки ҷамол ту дид ҳайрон монад
مصوّری که جمال تو دید حیران ماند
Чу дар хаёли дароварди зебу ранги туро
چو در خیال درآورد زیب و رنگ تو را
зи санги Лайлӣ агар коса ӣӣ шикаст чаҳ шуд
ز سنگ لیلی اگر کاسهای شکست چه شد
ҶФокшони ҳама бар сар зананд санги туро
جفاکشان همه بر سر زنند سنگ تو را
Ҳазор бори дамӣ аз барои мади назар
هزار بار دمی از برای مدّ نظر
Ба лавҳи синаи кашами сӯрати хаданги туро
به لوح سینه کشم صورت خدنگ تو را
Латифаи иисти ниҳон дар такаллумат ки зи ноз
لطیفهیست نهان در تکلّمت که ز ناز
Бкси нмикнди изҳори сулҳу ҷанги туро
بکس نمیکند اظهار صلح و جنگ تو را
Сухан якеаст бирав боғбону ишваи мада
سخن یکیست، برو باغبان و عشوه مده
Ки дил қабул надорад гули ду ранги туро
که دل قبول ندارد گل دو رنگ تو را
Дилам ки ҳмнФсӣ кард бо ту эй мутриб
دلم که همنفسی کرد با تو ای مطرب
Навой нолаи фузуни сохт тори чанги туро
نوای ناله فزون ساخت تار چنگ تو را
Наҳуфт нолаи фиғонии даруни парда ӣ дил
نهفت ناله فغانی! درون پردهٔ دل
Чу гули бғнчаҳи нигаҳдошти ному нанги туро
چو گل بغنچه نگهداشت نام و ننگ تو را