Дарин чаман чаҳ гулӣ боз шуд ба манзили мо
در این چمن چه گلی باز شد به منزل ما
Каз он ба бод фано рафт ғунчаи дили мо
کز آن به باد فنا رفت غنچهٔ دل ما
Надидаи равшании дидаи умед ҳануз
ندیده روشنی دیدهٔ امید هنوز
Фалаки нишонд ба як дами чароғи маҳфили мо
فلک نشاند به یک دم چراغ محفل ما
Дигар барои чаҳ нахл умед бинишонем
دگر برای چه نخل امید بنشانیم
Чу гул накард ниҳолӣ ки буд ҳосили мо
چو گل نکرد نهالی که بود حاصل ما
Ба хӯни зи лолаи рухони панҷа ки бартобем ?
به خون ز لالهرخان پنجهٔ که برتابیم؟
Ки дар миёна аён нест дасти қотили мо
که در میانه عیان نیست دست قاتل ما
Қиёматаст мулоқоти ёри ғоиби хеш
قیامت است ملاقات یار غایب خویش
Фиғон ки то ба қиёмат бимонад мушкили мо
فغان که تا به قیامت بمانْد مشکل ما
Чунон маӣ ки муқобил ба чашми равшан буд
چنان مهی که مقابل به چشم روشن بود
Бибин ки чун фалакаши барад аз муқобили мо
ببین که چون فلکش برد از مقابل ما
Баланди сози фиғонии сурӯди навҳа ки рафт
بلند ساز فغانی! سرود نوحه که رفت
Таронаи тараб ва бе ғамии зи манзили мо
ترانهٔ طرب و بیغمی ز منزل ما