Ид шуд ҳар каси маи навро мборкбод кард
عید شد هر کس مه نو را مبارکباد کرد
Ҳар гирифтории бтоқи абрӯеи дил шод кард
هر گرفتاری بطاق ابرویی دل شاد کرد
Гиря ӣ мисатони зи сӯзу нола ӣ чанги сабӯҳ
گریه ی مستان ز سوز و ناله ی چنگ صبوح
Зоҳид хилват нишинро рахна дар аврод кард
زاهد خلوت نشین را رخنه در اوراد کرد
Шоми ид аз ҷони худ бе ӯ малолии доштам
شام عید از جان خود بی او ملالی داشتم
Омад он сарви ваз қайд ҳастем озод кард
آمد آن سرو وز قید هستیم آزاد کرد
Гарчи куштани одат мардум набошад рӯзи ид
گرچه کشتن عادت مردم نباشد روز عید
Ҷони фидои чашм ӯ кин шеваро бунёд кард
جان فدای چشم او کاین شیوه را بنیاد کرد
Раҳматӣ буд онкӣ омад бар серуми ҷилваи кунон
رحمتی بود آنکه آمد بر سرم جلوه کنان
Ин ки рафт ва ҳамАннан шуд бо бидон бедод кард
این که رفت و همعنان شد با بدان بیداد کرد
Банда ӣ он сарви озодам ки дар гулгашти ид
بنده ی آن سرو آزادم که در گلگشت عید
Дардмандонро ба ташрифи иёдат шод кард
دردمندان را به تشریف عیادت شاد کرد
Ҳар сари мӯии фиғонии нола ӣӣ дорад зи шавқ
هر سر موی فغانی ناله یی دارد ز شوق
Гарчи натавонади зи заъфи он нотавон фарёд кард
گرچه نتواند ز ضعف آن ناتوان فریاد کرد