Забон ба васфи ҷамоли ту барнаме ояд

زبان به وصف جمال تو برنمی‌آید

Ки хӯбии ту ба тақрир дар наме ояд

که خوبی تو به تقریر در نمی‌آید

Ҳазор сӯрат агар мекашад мусаввири сунъ

هزار صورت اگر می‌کشد مصوّر صُنع

Яке зи шакли ту матбӯъ тар наме ояд

یکی ز شکل تو مطبوع‌تر نمی‌آید

Чаҳ васфи ҷилваи гулҳои ношукуфта кунам

چه وصف جلوهٔ گل‌های ناشکفته کنم

Чу ғайри ҳасани туам дар назар наме ояд

چو غیر حسن توام در نظر نمی‌آید

Бар он серум ки ба сари вақти куштанами ое

بر آن سرم که به سر وقت کشتنم آیی

Дареғу дард ки умрам ба сар наме ояд

دریغ و درد که عمرم به سر نمی‌آید

Ки меравад ба тамошои он хуҷастаи ҷамол

که می‌رود به تماشای آن خجسته‌جمال

Ки аз назора ӯ бехабар наме ояд

که از نظارهٔ او بی‌خبر نمی‌آید

зи оби дидаи ҳайрони хеш дар аҷабам

ز آب دیدهٔ حیران خویش در عجبم

Ки бе нишонаи хӯн ҷигар наме ояд

که بی‌نشانهٔ خونِ جگر نمی‌آید

Нишон ӯ з ки пурсади фиғонии ҳайрон

نشان او ز که پرسد فغانی حیران

Ки ҳар ки рафт ба кӯяш дигар наме ояд

که هر که رفت به کویش دگر نمی‌آید