То чанд дардисари кашам аз гуфтугӯии хеш

تا چند دردسر کشم از گفتگوی خویش

Ҷое рӯм ки худ набарам роҳи сӯии хеш

جایی روم که خود نبرم راه سوی خویش

Чун ман бхўии каси ниму каси бхўии ман

چون من بخوی کس نیم و کس بخوی من

Он хубтар ки хуй кунам ҳам бхўии хеш

آن خوبتر که خوی کنم هم بخوی خویش

Хуши ҳолатӣ ки дар талабат гум шавам зи худ

خوش حالتی که در طلبت گم شوم ز خود

Чндонкаҳ то абад накунам ҷустуҷӯии хеш

چندانکه تا ابد نکنم جستجوی خویش

Бирнгми ончунон ки дарин бӯстон чу гул

بیرنگم آنچنان که درین بوستان چو گل

Огаҳ намешавад дилам аз рангу буии хеш

آگه نمی شود دلم از رنگ و بوی خویش

Равшандилон чу оина аз ғояти сафо

روشندلان چو آینه از غایت صفا

Бенанд рӯй халқ ва набенанд рӯй хеш

بینند روی خلق و نبینند روی خویش

То шуд каманди зулфи ту пайванди ҷони ман

تا شد کمند زلف تو پیوند جان من

Сайд дилам рамед з ҳар тори мӯии хеш

صید دلم رمید ز هر تار موی خویش

Рндисти дили шикастаи фиғонии хоксор

رندیست دل شکسته فغانی خاکسار

Бар санг имтиҳон зада сад раҳи сабуии хеш

بر سنگ امتحان زده صد ره سبوی خویش