Фардо ки ҳар ғанӣами намояди ғанӣами хеш
فردا که هر غنیم نماید غنیم خویش
Даст манасту домани ёри қадими хеш
دست منست و دامن یار قدیم خویش
ё раби бмзҳб ки буд сӯхтани раво
یا رب بمذهب که بود سوختن روا
Онро ки парваранд бинозу Наими хеш
آنرا که پرورند بناز و نعیم خویش
Гар паии баради ғанӣ ки чаҳ судаст дар карам
گر پی برد غنی که چه سودست در کرم
Резад чу об дар қадами халқи сими хеш
ریزد چو آب در قدم خلق سیم خویش
Ёрӣ куҷост то бхробот рӯ наҳем
یاری کجاست تا بخرابات رو نهیم
Каз даст додаем раҳи мустақӣми хеш
کز دست داده ایم ره مستقیم خویش
Нозктрст аз онкӣ тавон дод азуи нишон
نازکترست از آنکه توان داد ازو نشان
Он гул ки тозаи сохт ҷаҳон аз насими хеш
آن گل که تازه ساخت جهان از نسیم خویش
Мо дар арақи заранги хушу буии дилкашаш
ما در عرق زرنگ خوش و بوی دلکشش
ӯ бениёз чун гул ва май аз шамеми хеш
او بی نیاز چون گل و می از شمیم خویش
Ошиқ на онкасаст ки маъшӯқи длнўоз
عاشق نه آنکسست که معشوق دلنواز
Созад бараваду бодаи мудомаши надими хеш
سازد برود و باده مدامش ندیم خویش
Ном аз карами саботи пазирад на аз дирам
نام از کرم ثبات پذیرد نه از درم
Ин нукта гуфт ҳотами тай бо надими хеш
این نکته گفت حاتم طی با ندیم خویش
Донстнисти сари муҳаббат на гуфтанӣ
دانستنیست سر محبت نه گفتنی
Бигзор фаҳми нуктаи бтбъи салими хеш
بگذار فهم نکته بطبع سلیم خویش
Муҳаррам нашуд фиғонии дарвеши кони ғаюр
محرم نشد فغانی درویش کان غیور
Мейри андеши бтири зи гирди ҳарими хеш
میر اندیش بتیر ز گرد حریم خویش