Кӣ буд эй гул ки тангат дар дили шайдои кашам

کی بود ای گل که تنگت در دل شیدا کشم

Чанд нози сарву ҷаври ғунчаи раънои кашам

چند ناز سرو و جور غنچهٔ رعنا کشم

Бегул рӯй ту дар хилвати сарои чашму дил

بی‌گل روی تو در خلوت‌سرای چشم و دل

Хуш набошадгар ҳазорон сӯрати зебои кашам

خوش نباشد گر هزاران صورت زیبا کشم

Май кашами домани зи гирди роҳат аз ғайрат вале

می‌کشم دامن ز گرد راهت از غیرت ولی

Гар диҳад дастами равон дар дидаи бинои кашам

گر دهد دستم روان در دیدهٔ بینا کشم

Чанд давр аз чашмаи нӯши ту аз дарди фироқ

چند دور از چشمهٔ نوش تو از درد فراق

Сари нуҳум дар оби шӯри дидау дарёи кашам

سر نهم در آب شور دیده و دریا کشم

Мондаам дар дашти ҳурмону зи дасти рӯзгор

مانده‌ام در دشت حرمان و ز دست روزگار

Он қадр фурсат намеёбам ки хор аз пои кашам

آنقدر فرصت نمی‌یابم که خار از پا کشم

Танг шуд бар ман фазои шаҳр аз он мишкӣни ғизол

تنگ شد بر من فضای شهر از آن مشکین‌غزال

Дасти ҳиммати баъди азин дар домани саҳрои кашам

دست همت بعد ازین در دامن صحرا کشم

Чун фиғонӣ аз дили сӯзону чашми ашкбор

چون فغانی از دل سوزان و چشم اشکبار

Шуъла аз дарё барорам лола аз хорои кашам

شعله از دریا برآرم لاله از خارا کشم