Гар он тарки хатое нӯш созад ҷоми саҳбо ро
گر آن ترک خطایی نوش سازد جام صهبا را
Нахусти оради сӯии мо трктози қатлу яғмо ро
نخست آرد سوی ما ترکتاز قتل و یغما را
Рахш дар нозукӣ бар бод дода сафҳаи гул ро
رخش در نازکی بر باد داده صفحه گل را
Қадаш дар чобукӣ бар хоки шондаҳи сарви раъно ро
قدش در چابکی بر خاک شانده سرو رعنا را
Ба манъи бӯси он лаб чун дусад тираст аз мижгон
به منع بوس آن لب چون دوصد تیرست از مژگان
Ки дар хотир туанд роҳ додан ин таманноро ?
که در خاطر تو اند راه دادن این تمنا را؟
Баҳори оризашро тозаи гулҳои аҷаби бушковат
بهار عارضش را تازه گلهای عجب بشکفت
Худоро муддаӣ монеъ машав икдми тамошо ро
خدا را مدعی مانع مشو یکدم تماشا را
Ману кӯии Муғон ваон мғбчаҳ каз лаъли ҷон парвар
من و کوی مغان وان مغبچه کز لعل جانپرور
Ба нукта карда зини дайри куҳани беруни масеҳо ро
به نکته کرده زین دیر کهن بیرون مسیحا را
Чу дар кӯии хароботаш ба як соғар наме гиранд
چو در کوی خراباتش به یک ساغر نمیگیرند
Бар оташи афканам ба ин либоси зуҳду тақво ро
بر آتش افکنم به این لباس زهد و تقوا را
Чаҳ пӯшонами зи мардуми котши ишқ май равшан
چه پوشانم ز مردم کآتش عشق می روشن
зи чоки сина зоҳир кард сари махфии мо ро
ز چاک سینه ظاهر کرد سر مخفی ما را
Бигӯ корнди ҷоми ҷами зи махзан эй шаҳи хубон
بگو کآرند جام جم ز مخزن ای شه خوبان
Ки бинмоем ба шоҳон бевафоеҳои дунё ро
که بنمایم به شاهان بیوفاییهای دنیا را
Ғазали гуфтан мусаллам шуд ба ҳофиз шояд эй фонӣ
غزل گفتن مسلم شد به حافظ شاید ای فانی
Намоеи чошнии дарюза зон назми ҷаҳони оро
نمایی چاشنی دریوزه زان نظم جهانآرا