Бошудам хуррамӣ аз ҳар чаҳ дарин олам азуаст
باشدم خرمی از هر چه درین عالم ازوست
Аз ғамаш низ дилами шод буд кин ҳам азуаст
از غمش نیز دلم شاد بود کین هم ازوست
Набӯд ҳеҷ тафовути зи нишоту ғами даҳр
نبود هیچ تفاوت ز نشاط و غم دهر
Ба висолам чу нишот ва ба фироқам ғам азуаст
به وصالم چو نشاط و به فراقم غم ازوست
Захми ҳиҷраш ба дилами марҳами васлаш бар вай
زخم هجرش به دلم مرهم وصلش بر وی
Хушам ояд ки марои захми азу марҳам азуаст
خوشم آید که مرا زخم ازو مرهم ازوست
Ҷон агар рафту ғами вдст ба ҷояш бинишаст
جان اگر رفت و غم ودست به جایش بنشست
Аз чаҳ хушҳол набошам магари инам кам азуаст ?
از چه خوشحال نباشم مگر اینم کم ازوست؟
Нестам одамӣ иршод набошам зи ғамаш
نیستم آدمی ارشاد نباشم ز غمش
Чун ғаму шодии анвоъ банӣ одам азуаст
چون غم و شادی انواع بنی آدم ازوست
Аз ғами ёри малулам агарам бода диҳад
از غم یار ملولم اگرم باده دهد
На з мехуррамем дон ки дилам хуррам азуаст
نه ز می خرمیم دان که دلم خرم ازوست
Фонёи мотаму сур ҳама яксонаст азонк
فانیا ماتم و سور همه یکسانست ازانک
Сур дар васлами азуи ҳиҷр чу шуд мотам азуаст
سور در وصلم ازو هجر چو شد ماتم ازوست