Агар ба майкадаам икшб анҷуман бошад

اگر به میکده ام یکشب انجمن باشد

Чароғи анҷумани он ба ки ёр ман бошад

چراغ انجمن آن به که یار من باشد

Чаҳ майл боғ кунам бо вуҷӯди қаду Рахш

چه میل باغ کنم با وجود قد و رخش

Ки сад фароғатам аз сарв ва ёсуман бошад

که صد فراغتم از سرو و یاسمن باشد

зи зулфи пршкнши сайди дили чисони барраад

ز زلف پرشکنش صید دل چسان برهد

Ки сад каманди балои зер ҳар шикан бошад

که صد کمند بلا زیر هر شکن باشد

Шаҳиди ишқи ту аз хок чун براردи сар

شهید عشق تو از خاک چون برآرد سر

Чу лолаи ғарқ майу доғ бар кафан бошад

چو لاله غرق می و داغ بر کفن باشد

зи равзаи дайри Муғон орзӯ кунам дар ҳашар

ز روضه دیر مغان آرزو کنم در حشر

Ғарибро дили маҳзуни сӯй ватан бошад

غریب را دل محزون سوی وطن باشد

Куҷост меки бишӯяд зи лавҳи хотири пок

کجاست می که بشوید ز لوح خاطر پاک

?герати зи меҳнати даврони ду сад сухан бошад

گرت ز محنت دوران دو صد سخن باشد

Агар ба дашти фанои хок раҳ шавад фонӣ

اگر به دشت فنا خاک ره شود فانی

Ба боди сӯии тўоши майл омадан бошад

به باد سوی تواش میل آمدن باشد