Гирифт гиряи мо кӯҳу дашту саҳро ро

گرفت گریه ما کوه و دشت و صحرا را

Дигар зи дида ба дили сари диҳеми дарё ро

دگر ز دیده به دل سر دهیم دریا را

Ту чун ба чашми сияҳи масти бодаи паймое

تو چون به چشم سیه مست باده‌پیمایی

Май киришма Юсуф кашад Зулайхо ро

می کرشمه یوسف کشد زلیخا را

зи ҷӯши гиряи талхам на дида монад ва на дил

ز جوش گریه تلخم نه دیده ماند و نه دل

Чаҳ бода буд ки бгдохти чашми мино ро

چه باده بود که بگداخت چشم مینا را

Ба чини абрӯии носеҳи зи гиря бас накунем

به چین ابروی ناصح ز گریه بس نکنیم

Касе набаста ба занҷири мавҷи дарё ро

کسی نبسته به زنجیر موج دریا را

Гузашти умр ва надидам фурӯғи субҳдамӣ

گذشت عمر و ندیدم فروغ صبحدمی

Ба хоки баради шабами орзӯии фардо ро

به خاک برد شبم آرزوی فردا را

зи оҳи гарми фасеҳӣ ҳазар кунед ки дӯш

ز آه گرم فصیحی حذر کنید که دوش

Чу доғи лола дар оташи нишонди фардо ро

چو داغ لاله در آتش نشاند فردا را