Бар хирманами талиъаи барқӣ гузор кард

بر خرمنم طلیعه برقی گذار کرد

Аз шуълаи мӯ ба мӯии марои моя дор кард

از شعله مو به موی مرا مایه‌دار کرد

Иқболи дидаи байн ки зи Мисри висоли дӯст

اقبال دیده‌بین که ز مصر وصال دوست

Бар ҳар нигоҳи ҳасрати дидор бор кард

بر هر نگاه حسرت دیدار بار کرد

Шухии нигар ки шуълаи як лолаи зори доғ

شوخی نگر که شعله یک لاله‌زار داغ

Аз мо гирифт ва бар ҷигари мо нисор кард

از ما گرفت و بر جگر ما نثار کرد

Абрии баромад аз чамани ишқи доғи рез

ابری برآمد از چمن عشق داغ ریز

Гулзор будам аз карамами лола зор кард

گلزار بودم از کرمم لاله‌زار کرد

Чун буии гули мурӣди насимам ки файзи он

چون بوی گل مرید نسیمم که فیض آن

Ҳар ҷои гузашти ҳамчуи маниш биқрор кард

هر جا گذشت همچو منش بیقرار کرد

Паймӯд аз он шароб ба ман чашми масти дӯст

پیمود از آن شراب به من چشم مست دوست

Каз тавба накарда маро шармсор кард

کز توبه نکرده مرا شرمسار کرد

Дилро сумуми ашки фасеҳии тамоми сӯхт

دل را سموم اشک فصیحی تمام سوخت

Охири гиёҳи ташнаи лаби мо баҳор кард

آخر گیاه تشنه‌لب ما بهار کرد