Зиҳии зи машриқи табъи ту офтоби хаҷал
زهی ز مشرق طبع تو آفتاب خجل
Ки ҳар чаҳ зодаи ин машриқи сет беҳтар азуаст
که هر چه زاده این مشرقست بهتر ازوست
Тавозуъии сети зи ту машриқии вагарнаи сипеҳр
تواضعیست ز تو مشرقی وگرنه سپهر
Фусурдаи ғунчаи пари гирду хок ин минӯаст
فسرده غنچه پر گرد و خاک این مینوست
Чу лаб ба шъргшоиии зи файзи шодобӣ
چو لب به شعرگشایی ز فیض شادابی
Сухан бар он лаб монанди сабза бар лаб ҷӯаст
سخن بر آن لب مانند سبزه بر لب جوست
зи нави баҳори замири ту гӯшро чун гул
ز نوبهار ضمیر تو گوش را چون گل
Ҳазор гӯнаи таровати буруни зи ранг ва з бӯаст
هزار گونه طراوت برون ز رنگ و ز بوست
Ба тухми кории табъ ва ба обёрии фикр
به تخم کاری طبع و به آبیاری فکر
Чаҳ эҳтиёҷи марои васфи ту гул худруаст
چه احتیاج مرا وصف تو گل خودروست
Савод хат диҳад аз маънии ту накҳати машк
سواد خط دهد از معنی تو نکهت مشک
Магари маъонии рангини ту гул шаб бӯаст
مگر معانی رنگین تو گل شببوست
Хаёли зулф батон ҳаст дар дили ҳамаи кас
خیال زلف بتان هست در دل همه کس
Чаро ҳамин сухани дилкаши ту ънбрбўст
چرا همین سخن دلکش تو عنبربوست
Вафои ?шкевҳо софӣ дило малик табъан
وفا شکوها صافی دلا ملک طبعا
Ғубори хотират аз ман бигӯӣ то з чаҳ рӯаст
غبار خاطرت از من بگوی تا ز چه روست
Агар фусурдаи забонии зи ғмз ҳарфӣ гуфт
اگر فسردهزبانی ز غمز حرفی گفت
Ту худ ндонӣ кони оби хона зод сабуаст
تو خود ندانی کان آب خانهزاد سبوست
Забони бандау бади гуфтан осмон донад
زبان بنده و بد گفتن آسمان داند
Ки дар қабӣлаи нутқам ҳар ончӣ ҳаст накӯаст
که در قبیله نطقم هر آنچه هست نکوست
Ба ростии суханам дар замона машҳураст
به راستی سخنم در زمانه مشهورست
Вагар каҷии сет дар он тоби зулф ва печиш мӯаст
وگر کجیست در آن تاب زلف و پیچش موست
Дар ин ҳадиси дили поки ту гувоҳ манаст
در این حدیث دل پاک تو گواه منست
Зиҳӣ ба покдлии шуҳра назд душману дӯст
زهی به پاکدلی شهره نزد دشمن و دوست
Фириштаи хўёи лаъни худо бар он шайтон
فرشته خویا لعن خدا بر آن شیطان
Ки саргардонии хуии ту аз ғўоит ӯст
که سرگردانی خوی تو از غوایت اوست
Чу нақши кӣнаи нафас дар дилаши гиреҳи бодо
چو نقش کینه نفس در دلش گره بادا
Ки мағзи талхи ҳамон ба ки пӯсад андрпўст
که مغز تلخ همان به که پوسد اندرپوست
Гар аҳмақӣ суханӣ гуфт мунҳариф чаҳ шӯй
گر احمقی سخنی گفت منحرف چه شوی
Шитоб бар асари бонги ғӯли ноникўст
شتاب بر اثر بانگ غول نانیکوست
Навой маҷлиси рӯҳонӣон чаҳ ме донад
نوای مجلس روحانیان چه میداند
Шиками парастӣ ки ҳамчу ноӣ ҷумла гулӯаст
شکمپرستی که همچو نای جمله گلوست
Гирифтам он ки забонам навой исён зад
گرفتم آن که زبانم نوای عصیان زد
Каримро на ки афви гуноҳи одат ва хуаст
کریم را نه که عفو گناه عادت و خوست
Ду байти калаками азин пеш карда буд иншо
دو بیت کلکم ازین پیش کرده بود انشا
Барои ҳоли ман имрӯзи он Дубайат накӯаст
برای حال من امروز آن دوبیت نکوست
зи дӯстон ба гуноҳӣ наметавон ранҷид
ز دوستان به گناهی نمیتوان رنجید
Каҷии зи дӯсти писандида чун хам абрӯаст
کجی ز دوست پسندیده چون خم ابروست
Дўрнгии гули раънои гуноҳ гулшан нест
دورنگی گل رعنا گناه گلشن نیست
Гуноҳи ранги рзиҳоӣ осмон дурӯаст
گناه رنگ رزیهای آسمان دوروست
Вале ба узр тасаллӣ намешавад дили ту
ولی به عذر تسلی نمیشود دل تو
Бҳл ки хушк шавам ҳамчуи машки андрпўст
بهل که خشک شوم همچو مشک اندرپوست
Ба хокам ар гузарии баъд аз он кунӣ маълум
به خاکم ار گذری بعد از آن کنی معلوم
Ки аз шамеми муҳаббати парасти марқади дӯст
که از شمیم محبتپرست مرقد دوست