Надонам аз назари ман чисон буд мастур
ندانم از نظر من چسان بود مستور
Рухӣ ки як нафас аз хотирам нагардад давр
رخی که یک نفس از خاطرم نگردد دور
Нигоҳ бад натавон бар ҷамол ӯ дидан
نگاه بد نتوان بر جمال او دیدن
Дуо кунем каз он рӯй чашми оинаи давр
دعا کنیم کز آن روی چشم آینه دور
зи ршги пайки назарро наметавонам дид
ز رشگ پیک نظر را نمیتوانم دید
Ки дар ҳаволӣ кӯяш кунад ба саҳви мурӯр
که در حوالی کویش کند به سهو مرور
Мабод арсаи офоқи буи ӯ гирад
مباد عرصه آفاق بوی او گیرد
Насимро ба сари кӯй ӯ мабод убӯр
نسیم را به سر کوی او مباد عبور
зи тоб нур нишоед ҷамол ӯ дидан
ز تاب نور نشاید جمال او دیدن
Хушо рухӣ ки буд дар шуъоъи худ мастур
خوشا رخی که بود در شعاع خود مستور
Ба чашми зарраи нзркн ки то шавад равшан
به چشم ذره نظرکن که تا شود روشن
Ки офтоб ба ҳар зарра кардааст зуҳӯр
که آفتاب به هر ذره کرده است ظهور
Замин ба хеш нагирад зи нанг , агар ушшоқ
زمین به خویش نگیرد ز ننگ، اگر عشاق
Ба ғайри ҳасрати дидор ӯ баранд ба гӯр
به غیر حسرت دیدار او برند به گور
Ҷаҳони дил ба ду мисра гирифт абрӯяш
جهان دل به دو مصرع گرفت ابرویش
Ки соҳиби сухан аз матлаъӣ шавад машҳур
که صاحب سخن از مطلعی شود مشهور
Хаёли дӯсти з ҳар тори мӯӣ ман ҷӯшад
خیال دوست ز هر تار موی من جوشد
Чу нақши сӯрати ширини зи хомаи шопӯр
چو نقش صورت شیرین ز خامه شاپور
Дилами зи ҷилваи аксаши чунин хароб чарост ?
دلم ز جلوه عکسش چنین خراب چراست؟
Рухӣ ки хона ойӣна шуд азуи маъмур
رخی که خانه آیینه شد ازو معمور
Пас аз фироқи тавон қадари васл донистан
پس از فراق توان قدر وصل دانستن
Марои зи кӯии ту даврии зарур буд зарур
مرا ز کوی تو دوری ضرور بود ضرور
Пас аз мушоҳидаи кӯҳкан яқинам шуд
پس از مشاهده کوهکن یقینم شد
Ки васли дӯсти муяссар набӯдааст ба зӯр
که وصل دوست میسر نبوده است به زور
Ман он ним ки халосии зи дард ва ғам ҷӯям
من آن نیم که خلاصی ز درد و غم جویم
Ҳазор чора намудем ки доғ шуд носур
هزار چاره نمودم که داغ شد ناسور
Ба ишқ рӯй ту сабрам фирор карда зи дил
به عشق روی تو صبرم فرار کرده ز دل
Ба ёди чашми ту хобами з чашм карда нФўр
به یاد چشم تو خوابم ز چشم کرده نفور
зи синаи сӯзи ту камтар намешавад ҳарчанд
ز سینه سوز تو کمتر نمیشود هرچند
Наад ба доғи дилами пунбаи марҳами кофур
نهد به داغ دلم پنبه مرهم کافور
Ҷудои зи кӯии ту роҳӣ ба ҳеҷ сӯ набарам
جدا ز کوی تو راهی به هیچ سو نبرم
Ки рӯзи ҳиҷри ту бар ман шабаст ва ман шаби кӯр
که روز هجر تو بر من شب است و من شبکور
Ба зикри номи хушат ташна меравад сероб
به ذکر نام خوشت تشنه میرود سیراب
Ба ёди лаъли лабат маст мешавад махмур
به یاد لعل لبت مست میشود مخمور
зи ршг рӯй ту доғаст зулфро магушоӣ
ز رشگ روی تو داغست زلف را مگشای
Ки доғи тоза хуршед мешавад носур
که داغ تازه خورشید میشود ناسور
Дилами зи лаъли ту бенеш ғайринӯш нахурд
دلم ز لعل تو بینیش غیرنوش نخورد
Рақиб бар сар шаҳдат нишаста чун занбӯр
رقیب بر سر شهدت نشسته چون زنبور
Нигоҳи масти ту ҳргаҳ ба тараф боғ афтод
نگاه مست تو هرگه به طرف باغ افتاد
Ба токи қатра май гашти донаи ангур
به تاک قطره می گشت دانه انگور
Кунун ки даври зи Кувайти асири ҳиҷронам
کنون که دور ز کویت اسیر هجرانم
Чу дар шиканҷаи шаҳбоз , нотавони ъсФўр
چو در شکنجه شهباز، ناتوان عصفور
Ҳавои фар сулаймонӣаст дар сари ман
هوای فر سلیمانی است در سر من
Ки карда танги ҷаҳонро ба ман чу дидаи мӯр
که کرده تنگ جهان را به من چو دیده مور
зи завқи хоки нишинии даргаӣ ки буд
ز ذوق خاکنشینی درگهی که بود
Қазоаши нодарраи меъмору осмони муздур
قضاش نادره معمار و آسمان مزدور
Чаҳ даргаи онкӣ буд остони сабъи шаддод
چه درگه آنکه بود آستان سبع شداد
Ба пеши муҳкамяши мӯътариф ба аҷзу қусӯр
به پیش محکمیش معترف به عجز و قصور
Чаҳ дарга онкӣ нигарадед дасти қудрат ро
چه درگه آنکه نگردید دست قدرت را
Баландпоятар аз ваии иморатии мақдӯр
بلندپایهتر از وی عمارتی مقدور
Чаҳ даргаи онкӣ ба чандини ҳазор нақш ва нигор
چهدرگه آنکه به چندین هزار نقش و نگار
Сипеҳрро натавон гуфт пеш ӯ маъмур
سپهر را نتوان گفت پیش او معمور
Чаҳ даргаи онкӣ ба сатҳашгар офтоб уфтад
چهدرگه آنکه به سطحش گر آفتاب افتد
Гумони барӣ ки ба сатҳаш нишаста гирди Фтўр
گمان بری که به سطحش نشسته گرد فتور
Ҳазор соли гузашту басо ки ҳам гузарад
هزار سال گذشت و بسا که هم گذرد
Ки бим кҳнгиш нест аз мурӯри дҳўр
که بیم کهنگیش نیست از مرور دهور
Баланди даргаи султони шаръу миллату дайн
بلند درگه سلطان شرع و ملت و دین
Ки сят салтанаташ ҳаст то ба нафхаи сувар
که صیت سلطنتش هست تا به نفخه صور
Эмоми ҷаъфари содиқ ки субҳи содиқи рой
امام جعفر صادق که صبح صادق رای
Ба меҳри хок дараш дам ҳаме занад аз нур
به مهر خاک درش دم همی زند از نور
Шаҳӣ ки доираи адл ӯ ду олам ро
شهی که دایره عدل او دو عالم را
Кашидааст дар оғӯш чун блдросўр
کشیده است در آغوش چون بلدراسور
Ба пеши арсаи малики абади ниҳоят ӯ
به پیش عرصه ملک ابد نهایت او
Намӯд малик сулаймонӣаст чун паии мӯр
نمود ملک سلیمانی است چون پی مور
Сукӯну ҷунбиши ройоти нусраташ то ҳаст
سکون و جنبش رایات نصرتش تا هست
Замонаро ҳаракот сипеҳр нест зарур
زمانه را حرکات سپهر نیست ضرور
зи бим , то ба абад муттасил шавад ба адам
ز بیم، تا به ابد متصل شود به عدم
Салобаташ ба азал гар кунад тағофули давр
صلابتش به ازل گر کند تغافل دور
Чунин ки доруӣ ҳар дард азуаст ҳайронам
چنین که داروی هر درد ازوست حیرانم
Ки офтоб чаро мондаи ин чунин ранҷур !
که آفتاب چرا مانده این چنین رنجور!
Ба ҳар тараф ки кунад майл , дар қадам бошад
به هر طرف که کند میل، در قدم باشد
Ба пеши абад чу сабо бар пасаш азал чу дбўр
به پیش ابد چو صبا بر پسش ازل چو دبور
Агар зи чеҳраи райш ниқоб бурдоранд
اگر ز چهره رایش نقاب بردارند
Чу офтоб шавад коиноти ғарқаи нур
چو آفتاب شود کاینات غرقه نور
Ба гулшанӣ ки чу хуршед партав андозад
به گلشنی که چو خورشید پرتو اندازد
зи шох хушк барояд гули таҷаллии нур
ز شاخ خشک برآید گل تجلی نور
Ба шукри неъмат ӯ осмон ба як сар пост
به شکر نعمت او آسمان به یک سر پاست
Кигар дамӣ биншинад з пой нест шакур
که گر دمی بنشیند ز پای نیست شکور
Муҳӣти илмаш агар мавҷ вар шавад гардад
محیط علمش اگر موجور شود گردد
Ба ним ршҳаҳ ӯ ҳали мушкилоти умӯр
به نیم رشحه او حل مشکلات امور
Ба гирди хотир ӯ сайри фавҷи фавҷи асрор
به گرد خاطر او سیر فوج فوج اسرار
Чунон ки дар чамани боғи хулди ҷилваи ҳур
چنانکه در چمن باغ خلد جلوه حور
Буд зи дафтараши афлоки он варақ ки буд
بود ز دفترش افلاک آن ورق که بود
Ба ним сафҳааш Инҷили забт ва ним збўр
به نیم صفحهاش انجیل ضبط و نیم زبور
Ду соя аз схту афв ӯ ҷҳиму Наим
دو سایه از سخط و عفو او جحیم و نعیم
Ду партав аз ғазаб ва лутф ӯст мотаму сур
دو پرتو از غضب و لطف اوست ماتم و سور
Агар забонаи қаҳри худои аёни хоҳӣ
اگر زبانه قهر خدا عیان خواهی
Бибин ба гӯшаи абрӯии қаҳр ӯ аз давр
ببین به گوشه ابروی قهر او از دور
Вагар кушода дар файзро ндидстӣ
وگر گشاده در فیض را ندیدستی
Бибин ба ҷабҳаи субҳи ояташи табассуми нур
ببین به جبهه صبح آیتش تبسم نور
Ҷароҳати дили сад хастаро шавад марҳам
جراحت دل صد خسته را شود مرهم
Табассумаш ба лаби лаъл чун шавад пуршӯр
تبسمش به لب لعل چون شود پرشور
зи файзи муъаддилати ом ӯ аҷаб набӯд
ز فیض معدلت عام او عجب نبود
Харобаи дили ошиқ агар шавад маъмур
خرابه دل عاشق اگر شود معمور
Чу ранг наҳй барояд ба чеҳраи нигаҳаш
چو رنگ نهی برآید به چهره نگهش
зи бим об шавад Зуҳра дар дили ангур
ز بیم آب شود زهره در دل انگور
Сиёсаташ ба ғазаби чеҳра чун барафрӯзад
سیاستش به غضب چهره چون برافروزد
Гиреҳ шавад нафаси нағма дар раги тнбўр
گره شود نفس نغمه در رگ طنبور
Расад ба сабъи шаддод ар мҳобтш фиканд
رسد به سبع شداد ار مهابتش فکند
Дар ӯ ба саъии тазалзули ҳзоргўнаҳи Фтўр
در او به سعی تزلزل هزارگونه فتور
Агар надонад қадараш чаҳ ғам ки рафта ба хоб
اگر نداند قدرش چه غم که رفته به خواب
Раги шуъӯри ҳасудаш ки ҳаст хасми шуъӯр
رگ شعور حسودش که هست خصم شعور
Забони душман ӯ неш мезанад бар дил
زبان دشمن او نیش میزند بر دل
Ба нӯш ғӯта занадгар чу нашутур занбӯр
به نوش غوطه زند گر چو نشتر زنبور
Чунон гирифтаи раги ҳалқи душманашро бухл
چنان گرفته رگ حلق دشمنش را بخل
Ки ошно ба гулӯяш нашуд ба ҷузи сотўр
که آشنا به گلویش نشد به جز ساطور
Ба ӯ адовати бадхоҳаш ихтиёрӣ нест
به او عداوت بدخواهش اختیاری نیست
Буд ҷабалии хафоаши душманӣ бо нур
بود جبلی خفاش دشمنی با نور
Вуҷӯди хасм барои зуҳӯр асбобаст
وجود خصم برای ظهور اسبابست
Ки офтоб ба тақрйв соя шуд машҳур
که آفتاب به تقریب سایه شد مشهور
з халқ ӯст фалаки миҷмарӣ ки ҳаст аз вай
ز خلق اوست فلک مجمری که هست از وی
Машоми олами болои пар аз бухор ва бихӯр
مشام عالم بالا پر از بخار و بخور
Ъзўбти суханаш дар мазоқи ташнаи ақл
عذوبت سخنش در مذاق تشنه عقل
Нишастааст чу май дар табиати махмур
نشسته است چو می در طبیعت مخمور
Ба гоҳи назм чу гардад сухан ба васфи кафш
به گاه نظم چو گردد سخن به وصف کفش
Ба мавҷ баҳр барояд мақтаоти бҳўр
به موج بحر برآید مقطعات بحور
Зиҳӣ ба зоту сифот аз ҷаҳонёни мумтоз
زهی به ذات و صفات از جهانیان ممتاز
Чу дар миёнаи анвори нури оташи тавр
چو در میانه انوار نور آتش طور
Ҳалоки назми улӯми ту назми ақди пурН
هلاک نظم علوم تو نظم عقد پرن
Асири насри каломи ту лؤлؤи мансур
اسیر نثر کلام تو لؤلؤ منثور
Зўоҳри ҳикмати осмони дайнро наҷм
زواهر حکمت آسمان دین را نجم
Ҷавоҳири клмти малики шаръро дастур
جواهر کلمت ملک شرع را دستور
зи хоки пои ту ҳар шаб ба дидаи бонии даҳр
ز خاک پای تو هر شب به دیدهبانی دهر
Кашад ба дидаи анҷуми сипеҳри серумаи нур
کشد به دیده انجم سپهر سرمه نور
Ба корхонаи тақдири мстмд аз тест
به کارخانه تقدیر مستمد از تست
Ба ҳалу ақли мақосиди мудаббироти умӯр
به حل و عقل مقاصد مدبرات امور
Буд овомир « кун »ро ба хиттаи тақдир
بود اوامر «کن» را به خطة تقدیر
Ба хотири ту вуруду зи синаи ту судӯр
به خاطر تو ورود و ز سینة تو صدور
Ғубори роҳи ту бар тан барои ҳифзи шараф
غبار راه تو بر تن برای حفظ شرف
Ҳзорбори накӯтар аз атласу сиФўр
هزاربار نکوتر از اطلس و سیفور
Дамӣ ба сояи девори Кувайти осўдн
دمی به سایه دیوار کویت آسودن
Марои зи сояи тӯбо баасту ҳуру қусӯр
مرا ز سایه طوبی به است و حور و قصور
Чаҳ хору хаси зи ҳаримат чаҳ болҳои малик
چه خار و خس ز حریمت چه بالهای ملک
Ки рафтаанд ба ҷоруби турра , зумраи ҳур
که رفتهاند به جاروب طره، زمره حور
Ба манзилӣ ки буд хокрўби боли малик
به منزلی که بود خاکروب بال ملک
Чаҳ айшҳо ки тавон кард чашми душмани кӯр
چه عیشها که توان کرد چشم دشمن کور
Кунад ба шокала ҳарчанд майл бокӣ нест
کند به شاکله هرچند میل باکی نیست
Гузидаанд агар бар ту хасмро ҷумҳӯр
گزیدهاند اگر بر تو خصم را جمهور
Агар ба роҳи ту камтари раванди халқ чаҳ бок
اگر به راه تو کمتر روند خلق چه باک
Пули сиротӣ ва сахтаст бар сироти убӯр
پل صراطی و سخت است بر صراط عبور
Мтобъи ту агар кам буд чаҳ ғам ки шавад
متابع تو اگر کم بود چه غم که شود
Ҳазор қатраи яке гавҳар , онгаҳе ба мурӯр
هزار قطره یکی گوهر، آنگهی به مرور
Гуҳари з тинат покаст ончунон кам ёб
گهر ز طینت پاکست آنچنان کمیاب
ХзФ з хаст зотаст он қадри мўФўр
خزف ز خست ذاتست آنقدر موفور
Буд ба мартаба аз коинот беш инсон
بود به مرتبه از کاینات بیش انسان
Вале буд ба маротиб кам аз шумораи мӯр
ولی بود به مراتب کم از شماره مور
Ҳамон ба ҷинс башар кун назар ки аз касрат
همان به جنس بشر کن نظر که از کثرت
Миёни одаму но одамаст нисбати давр
میان آدم و نا آدم است نسبت دور
Ҳазор нутфа бибояд ки то яке гардад
هزار نطفه بباید که تا یکی گردد
Ба қобилияти атвори муттасиф ба вуфӯр
به قابلیت اطوار متصف به وفور
Чу гашти қобили атвори қарнҳо бояд
چو گشت قابل اطوار قرنها باید
Ки то яке ба бар ояд ба сад машаққату зӯр
که تا یکی به بر آید به صد مشقت و زور
Расед чун ба бар аз садҳазор кам уфтад
رسید چون به بر از صدهزار کم افتد
Яке чунон ки баради дидаи нуру синаи сарвар
یکی چنان که برد دیده نور و سینه سرور
Хдоигонои хуршеди олами ҷоно
خدایگانا خورشید عالم جانا
Туе ки сар набувват шуд аз ту маҳви зуҳӯр
تویی که سر نبوت شد از تو محو ظهور
Туе хулосаи итрати туе нқоўаҳи насл
تویی خلاصه عترت تویی نقاوه نسل
Ки ҳаст рӯҳи расӯл аз ту то абади масрур
که هست روح رسول از تو تا ابد مسرور
Туе ту онкии пас пардаи қазои умрӣ
تویی تو آنکه پس پرده قضا عمری
Азал ба рӯй ту афканда буд чашм аз давр
ازل به روی تو افکنده بود چشم از دور
Давоми давлати тести онкии чашм бар раҳ ӯст
دوام دولت تست آنکه چشم بر ره اوست
Абад ки дар ттқ ғайб карда рухи мастур
ابد که در تتق غیب کرده رخ مستور
Чаҳ ҳоҷатаст ба таърифи ақли зоти туро
چه حاجت است به تعریف عقل ذات ترا
Ки бе ниқоби даройади рахт ба дидаи кӯр
که بینقاب درآید رخت به دیده کور
Манам яке зи ғуломони даргаат ки мудом
منم یکی ز غلامان درگهت که مدام
Ба мадҳати ту забонам буд забонаи нур
به مدحت تو زبانم بود زبانه نور
Манам ки ҳаст зи фикри мдиҳи ҳазрати ту
منم که هست ز فکر مدیح حضرت تو
Сродқоти замирами сарои пардаи ҳур
سرادقات ضمیرم سرای پرده حور
Ҳазор сӯрати ширини сияҳ қалам дорам
هزار صورت شیرین سیهقلم دارم
СФидрўитар аз нақши хомаи шопӯр
سفیدرویتر از نقش خامه شاپور
Дарин қасида ту кардӣ мадади равони маро
درین قصیده تو کردی مدد روان مرا
Вагарнаи монда ба банд « Заҳир » буд ин зӯр
وگرنه مانده به بند «ظهیر» بود این زور
Кунун умед ман инаст дар ду оламу бас
کنون امید من اینست در دو عالم و بس
Ки бо сегон дарат созадам худои маҳшур
که با سگان درت سازدم خدا محشور
Чу офтоб кунам чархи хокро равшан
چو آفتاب کنم چرخ خاک را روشن
Чароғи меҳри туро чун барам ба хилвати гӯр
چراغ مهر ترا چون برم به خلوت گور
Агарчӣ зулати файёз беш дар беш аст
اگرچه زلت فیاض بیش در بیش است
Гуноҳ ӯ ба ту бахшад яқини худои ғафур
گناه او به تو بخشد یقین خدای غفور
Ҳамеша то ки гиребони ақл кул бошад
همیشه تا که گریبان عقل کل باشد
Чу ҷайб хомаам аз мадҳати ту машриқи нур
چو جیب خامهام از مدحت تو مشرق نور
Буд ба домани лутфи ту муттасили дастам
بود به دامن لطف تو متصل دستم
Чу дасти ҳасрати зоҳид ба тарафи домани ҳур
چو دست حسرت زاهد به طرف دامن حور