Муҳӣти ишқ ки мо марказему ғами паргор
محیط عشق که ما مرکزیم و غم پرگار
Дарин миёнаи зи олам гирифтаем канор
درین میانه ز عالم گرفتهایم کنار
Ҷунуни ишқи брорости хуш ба сомонам
جنون عشق برآراست خوش به سامانم
Куҷост ақл ки гул чӣанд андарин гулзор
کجاست عقل که گل چیند اندرین گلزار
Фитодаи хуш ба сари ҳам матоъи расвоӣ
فتاده خوش به سر هم متاع رسوایی
Хирад куҷост ки савдо кунад дарин бозор
خرد کجاست که سودا کند درین بازار
Ба доғи ишқи бророи пой то сари хеш
به داغ عشق برآرای پای تا سر خویش
Ки зеб сикка кунад нақдро тамоми айёр
که زیب سکه کند نقد را تمام عیار
Фиреби ишва дунё махӯр ки оина ро
فریب عشوه دنیا مخور که آینه را
Ба ранг сабз кунад ҷилва дар назари зангор
بهرنگ سبز کند جلوه در نظر زنگار
Ба зуҳди ғарра буд зоҳид ва наме донад
به زهد غره بود زاهد و نمیداند
Ки тори сбҳаҳ ба тадриҷ мешавад зуннор
که تار سبحه به تدریج میشود زنار
Ба тани либоси дирами зи орзӯии урёнӣ
به تن لباس درم ز آرزوی عریانی
Ки банд пост дарин роҳ бар серуми дастор
که بند پاست درین راه بر سرم دستار
Чигуна роз бапушам ки ҳамчуи ғунчаи гул
چگونه راز بپوشم که همچو غنچه گل
Ниқоби худ ба худ уфтад марои зи чеҳраи кор
نقاب خود به خود افتد مرا ز چهره کار
Чунон ҳикояти ман ташнаи шунидан ҳост
چنان حکایت من تشنه شنیدنهاست
Ки боз мешавад аз шавқи худ ба худ тӯмор
که باز میشود از شوق خود به خود طومار
Аҷаби вилоят амнӣаст малики расвоӣ
عجب ولایت امنی است ملک رسوایی
Ки ҳеҷ гӯна касе бо касе надорад кор
که هیچگونه کسی با کسی ندارد کار
Ту ҳозирӣ ва ба рӯй ту дидаи нгшоим
تو حاضری و به روی تو دیده نگشایم
Ки бе рухи ту фаромӯш кардаам дидор
که بیرخ تو فراموش کردهام دیدار
Дигар ба манъи ман эй ақли дардисар кам каш
دگر به منع من ای عقل دردسر کم کش
Ки ман муҷодала бо хеш кардаам бисёр
که من مجادله با خویش کردهام بسیار
Кунун ки завқи ҷунун реша кард дар дили ман
کنون که ذوق جنون ریشه کرد در دل من
Дигар намешавад ин нахли канда аз бену бор
دگر نمیشود این نخل کنده از بن و بار
Кунун ки домани ман пари зи санги тФлонст
کنون که دامن من پر ز سنگ طفلانست
Хирад ба роҳам аз ойӣна мекашад девор
خرد به راهم از آیینه میکشد دیوار
Кунун ки карда мҷрдтрми зи нури назар
کنون که کرده مجردترم ز نور نظر
Фалак кашида ба гирдами зи обгинаи ҳисор
فلک کشیده به گردم ز آبگینه حصار
Дигар чаҳ дафъ маломат кунад нуҳуфтани ишқ
دگر چه دفع ملامت کند نهفتن عشق
Маро кунун ки барофтода парда аз рухи кор
مرا کنون که برافتاده پرده از رخ کار
Чаҳ пардагӣ кунадам тори анкабути охир
چه پردگی کندم تار عنکبوت آخر
Хирад чаҳ ҳарза ба ман май тунди ънокби вор
خرد چه هرزه به من میتند عناکبوار
Маро кунун ки намуданд роҳи олами ғайб
مرا کنون که نمودند راه عالم غیب
Дарин стмкдаҳи дигар на мумкинаст қарор
درین ستمکده دیگر نه ممکن است قرار
Чаҳ сон нигоҳ тавонад ба дида кард диранг !
چهسان نگاه تواند به دیده کرد درنگ!
Дамӣ ки парда баруфтад зи пеши чеҳраи ёр
دمی که پرده برافتد ز پیش چهره یار
Чу ишқ ҷой кунад дар табиатии ҳаргиз
چو عشق جای کند در طبیعتی هرگز
Ба ҳила ҳо натавон кард манъаш аз изҳор
به حیلهها نتوان کرد منعش از اظهار
Чароғ то ки ниФрўхтнд дар фонӯс
چراغ تا که نیفروختند در فانوس
зи халқ чеҳра тавонад наҳуфт дар шаби тор
ز خلق چهره تواند نهفت در شب تار
Зуҳӯри ишқ ба изҳор нест ҳоҷатманд
ظهور عشق به اظهار نیست حاجتمند
Ки зоҳираст вуҷӯди муассир аз осор
که ظاهر است وجود مؤثر از آثار
Ба аҳди ишқи мҷўииди асар з ҳастӣ ман
به عهد عشق مجویید اثر ز هستی من
Ки офтоби даройад ба сояи девор
که آفتاب درآید به سایه دیوار
Баҳор шуд чаманам аз насими гулшани ишқ
بهار شد چمنم از نسیم گلشن عشق
Чу гул шукуфтаам акнӯн дарин хуҷастаи баҳор
چو گل شکفتهام اکنون درین خجسته بهار
Кунун ки ҳам гул ва ҳам булбулами дарин гулшан
کنون که هم گل و هم بلبلم درین گلشن
Кунам ба васфи баҳори худ ин ғазали такрор
کنم به وصف بهار خود این غزل تکرار