зи мавҷи ранги гулу сабза дар ҳавои баҳор

ز موج رنگ گل و سبزه در هوای بهار

Ба боли ҷилваи товус май пурди гулзор

به‌بال جلوه طاووس می‌پرد گلزار

Ба нақли обу ҳавои ҳоҷат ар фитад ёбад

به نقل آب و هوا حاجت ار فتد یابد

зи нақли обу ҳавои чамани шифои бемор

ز نقل آب و هوای چمن شفا بیمار

Гирифт абри зи хиҷлати даричаи машриқ

گرفت ابر ز خجلت دریچه مشرق

Чу субҳи ғунча дамӣдан гирифт дар гулзор

چو صبح غنچه دمیدن گرفت در گلزار

Чу ташти хӯн шуда аз акси лолаи домани дашт

چو تشت خون شده از عکس لاله دامن دشت

Ба неш барқ гушӯданд то раги кҳсор

به نیش برق گشودند تا رگ کهسار

зи мавҷи сабзау гул бскаҳ гашта акс пазир

ز موج سبزه و گل بسکه گشته عکس‌پذیر

Ба ранги коғаз абрӣ шудаст абри баҳор

به رنگ کاغذ ابری شدست ابر بهار

Ба завқ дидани гули Тифли ғунчаи наргис

به ذوق دیدن گل طفل غنچه نرگس

Ба боғи пештар аз субҳ мешавад бедор

به باغ پیش‌تر از صبح می‌شود بیدار

Ҳаёи сириштии аҷзои боғи байн ки кунад

حیا سرشتی اجزای باغ بین که کند

Ҳазари зи сояи дасти чанори соқи чанор

حذر ز سایه دست چنار ساق چنار

Расед шӯри насими баҳор ва наздикаст

رسید شور نسیم بهار و نزدیکست

Ки чун шукуфаи маро во шавад зи сари дастор

که چون شکوفه مرا وا شود ز سر دستار

Ба муқтазои сафои замонаи аҳли назар

به مقتضای صفای زمانه اهل نظر

Кунанд аз пас девори сайр дар гулзор

کنند از پس دیوار سیر در گلزار

зи бас ба ҳукми сафо чун нигорхонаи рӯм

ز بس به حکم صفا چون نگارخانه روم

зи акси гул шудаи девори боғи пари з нигор

ز عکس گل شده دیوار باغ پر ز نگار

Сазад ки баҳри тамошои сабзау лола

سزد که بهر تماشای سبزه و لاله

Кунанд аҳли назари ҷумла рӯй дар девор

کنند اهل نظر جمله روی در دیوار

Чунон зи акси чаман сабз шуд замину замон

چنان ز عکس چمن سبز شد زمین و زمان

Ки сабз дарназар ояд басони хати ғубор

که سبز درنظر آید بسان خط غبار

Кунанд сайру сафои чамани сбкрўҳон

کنند سیر و صفای چمن سبکروحان

Ки буии гул шуда бар мураккаби насими савор

که بوی گل شده بر مرکب نسیم سوار

Шудаст файзи сбкрўҳии он чунон шойиъ

شدست فیض سبکروحی آن‌چنان شایع

Ки нест дидани зоҳид ба табъи мисатони бор

که نیست دیدن زاهد به طبع مستان بار

Чу мустаъид камоласт ҳар ниҳол инаст

چو مستعد کمالست هر نهال اینست

Ки нест ҷузи сари Мансури миваи сари дор

که نیست جز سر منصور میوه سر دار

Нишоти хандаи гули он қадар сироят кард

نشاط خنده گل آن قدر سرایت کرد

Ки нест нолаи булбули дарин баҳорони зор

که نیست ناله بلبل درین بهاران زار

Бидон мулоимат ояд нафаси зи ғунчаи бурун

بدان ملایمت آید نفس ز غنچه برون

Ки вокнди гиреҳи нағмаи мутриб аз раги тор

که واکند گره نغمه مطرب از رگ تار

Чунон табиат ашё шудаст тозаи писанд

چنان طبیعت اشیا شدست تازه پسند

Ки фохта накунад дарси сарвро такрор

که فاخته نکند درس سرو را تکرار

наме тавон ба забон аз кас интиқом кашид

نمی‌توان به زبان از کس انتقام کشید

Ки дар ҳавои сухан сахт мешавад ҳамвор

که در هوا سخن سخت می‌شود هموار

Шукуфа дар ттқ ҳола мешавад пинҳон

شکوفه در تتق هاله می‌شود پنهان

зи бас ки ноқаи абр аз намаст сангини бор

ز بس که ناقه ابر از نم است سنگین بار

Чу шоҳидони зи гармобаи омадаи берун

چو شاهدان ز گرمابه آمده بیرون

Намояд аз ттқи абри шохи гули дидор

نماید از تتق ابر شاخ گل دیدار

Буд замину замони хурраму шукуфта вале

بود زمین و زمان خرم و شکفته ولی

Дарин шукуфтаи ҳавои вдрини хуҷастаи баҳор

درین شکفته هوا ودرین خجسته بهار