зи нотавонӣ аз хеш май рӯм чу насим
ز ناتوانی از خویش میروم چو نسیم
зи заъф чун нафас ғунча мешавам таслим
ز ضعف چون نفس غنچه میشوم تسلیم
Нафаси нафас , нафас хаста меравад аз хеш
نفسنفس، نفس خسته میرود از خویش
Агар дароради дӯшӣ ба зери бори шамем
اگر درآرد دوشی به زیر بار شمیم
Нишоти иди фанои он чунон урӯҷ гирифт
نشاط عیدِ فنا آنچنان عروج گرفت
Ки зад кулоҳ намад пушти пои брдиҳим
که زد کلاه نمد پشت پای بردیهیم
Сари фитодагии мости инки май бинӣ
سر فتادگی ماست اینکه میبینی
Ки сар ба зонуӣ ӯ хоб карда арши азим
که سر به زانوی او خواب کرده عرش عظیم
Расед кор ба ҷое фурӯтаниҳо ро
رسید کار به جایی فروتنیها را
Ки даст ва по назанад бсмлми зи теғи ғанӣам
که دست و پا نزند بسملم ز تیغ غنیم
Даво чаҳ суди диламро ки дард бе лутфаст
دوا چه سود دلم را که درد بیلطفست
зи душманон чаҳ таваққуъ ки дӯст нест раҳим
ز دشمنان چه توقّع که دوست نیست رحیم
Накард ханда ба рӯем ба ҷуз шикастани ранг
نکرد خنده به رویم به جز شکستن رنگ
Набаст риштаи ҷонам ба ҷузи гусастани бим
نبست رشتة جانم به جز گسستن بیم
Дарин муҳӣти фано ва дарин мҳби ъно
درین محیط فنا و درین مهبّ عنا
Ба биқрории мавҷам ба изтироби насим
به بیقراری موجم به اضطراب نسیم
Ба ҳеҷ чизи тасаллӣ наметавонам шуд
به هیچ چیز تسلّی نمیتوانم شد
Магар ба суҳбати ҷонбхши садри ҳафт иқлӣм
مگر به صحبت جانبخش صدر هفت اقلیم
Хдоигони ҷаҳони садри хиттаи имон
خدایگان جهان صدر خطّة ایمان
Сипеҳри амну амони офтоби шаръи қавӣам
سپهر امن و امان آفتاب شرع قویم
Ривоҷи миллату дайни мирзои ҳабиби аллоҳ
رواج ملّت و دین میرزا حبیباللّه
Ки ҳаст хок дараш кӯҳли дидаи таъзим
که هست خاک درش کحل دیدة تعظیم
Ба даст баҳр навол ва ба дили ҷаҳони камол
به دست بحرِ نوال و به دل جهان کمال
Ба шани сипеҳри баланд ва ба рутбаи арши азим
به شان سپهر بلند و به رتبه عرش عظیم
Касе ки роҳ биёбад ба остона ӯ
کسی که راه بیابد به آستانة او
Дилаш наёяд зонҷо шудан ба боғи Наим
دلش نیاید زانجا شدن به باغ نعیم
Паноҳ дода аўбм намехӯрд зи фалак
پناه دادة اوبَم نمیخورد ز فلک
Умеди дида ӯ Ром намекунад аз бим
امید دیدة او رم نمیکند از بیم
Ба дӯстони вай ӯро чаҳ кор , гуедаш
به دوستان وی او را چه کار، گوییدش
Ки по дароз кунад осмон ба қадари гилӣм
که پا دراز کند آسمان به قدر گلیم
Ба даври суфраи рӯи гармӣ мурувват ӯст
به دور سفرة رو گرمی مروّت اوست
Ҳазор дасту забони сӯхта ба сон кулем
هزار دست و زبان سوخته بهسان کلیم
Азизи Мисри влои ту аз Фўозли ҷӯад
عزیز مصر ولای تو از فواضل جود
Ҳазор Юсуфи канъон дил харида ба сим
هزار یوسف کنعانِ دل خریده به سیم
Умум аз ту ба навъе гирифт ҷинси камол
عموم از تو به نوعی گرفت جنس کمال
Ки беш азин набӯд ҷинси қобили таъмим
که بیش ازین نبود جنس قابل تعمیم
Ба пеши рои мунират чу муртафаъ гардад
به پیش رای منیرت چو مرتفع گردد
Таназзул ар накунад офтоб , дорад бим
تنزّل ار نکند آفتاب، دارد بیم
Ба зулфи шоҳиди халқи тугар вазад шояд
به زلف شاهدِ خُلق تو گر وزد شاید
Ки атр гул накунадтар дигар димоғи насим
که عطر گل نکند تر دگر دماغ نسیم
Дуруст гардад ранги шикастаи хуршед
درست گردد رنگ شکستة خورشید
Ту мумиёе агар бахшяши зи лутфи ъмим
تو مومیایی اگر بخشیش ز لطف عمیم
Сироти шаръи ту аз бас ки мустақӣм буд
صراط شرع تو از بس که مستقیم بود
Касе ки мунҳариф аз вай шавад фитад ба ҷҳим
کسی که منحرف از وی شود فتد به جحیم
Нашуд миёни туу фазли ҷаъли мтхлл
نشد میان تو و فضل جعل متخلّل
Ки буд лозими зоти ту ин сифати зқдим
که بود لازم ذات تو این صفت زقدیم
Агар на иллати маълулият бадӣ додӣ
اگر نه علّت معلولیت بدی دادی
Хирад ба гавҳари фаъолат аз шарафи тақдим
خرد به گوهر فعّالت از شرف تقدیم
Чу қисм ҳар ки баради ҳисса аз ту чун мқсм
چو قسم هر که برد حصّه از تو چون مقسم
Тавонад аз мададат шуд ба офтоби қасим
تواند از مددت شد به آفتاب قسیم
Ҳиўлии сет ки рангӣ надорад аз сӯрат
هیولیست که رنگی ندارد از صورت
Ба пеши ҷавҳари зоти ту зоти хасми лӣим
به پیش جوهر ذات تو ذات خصم لئیم
Ҳануз нисбати дўрист онкӣ санҷидам
هنوز نسبت دوریست آنکه سنجیدم
Миёни хасми ту ва ӯ тафовутӣаст азим
میان خصم تو و او تفاوتیاست عظیم
Ки ҳаст қобил ҳар сӯрат ӯ зостъдод
که هست قابل هر صورت او زاستعداد
Ба зиди ҷумлаи сувари зоти хасмро тақвим
به ضدّ جمله صور ذات خصم را تقویم
Ба Фрдўҳмии хасми ту мктФии сет ки нест
به فردوهمی خصم تو مکتفیست که نیست
Вуҷӯди мутлақи азин беш қобили таъмим
وجود مطلق ازین بیش قابل تعمیم
Аз он тасаввури канаи назири тести маҳол
از آن تصور کنه نظیر تست محال
Ки зотяши адам мутлақасту зоти ъдим
که ذاتیش عدم مطلق است و ذات عدیم
Чу дар саросари майдони ҷавҳари муфрад
چو در سراسر میدان جوهر مفرد
Саманди ҷилвагарӣ тохти шани хасми лӣим
سمند جلوهگری تاختشان خصم لئیم
Ба ҳар ду гоми дарин тангнои биқдрӣ
به هر دو گام درین تنگنای بیقدری
Гирифтаи арсаи майдони ҷузви сад тақсим
گرفته عرصة میدان جزو صد تقسیم
Ҳакимро расад имрӯзи нафии ҷавҳари фард
حکیم را رسد امروز نفی جوهر فرد
Ки дили здқти табъи ту ҷузви рости ду ним
که دل زدقت طبع تو جزو راست دو نیم
зи худ рӯй ба раҳи фикр , ҳеҷ ҳоҷат нест
ز خود روی به ره فکر، هیچ حاجت نیست
Саманди фикри турои тозӣонаи тафҳим
سمند فکر ترا تازیانة تفهیم
Баҳори гулшани илмат ба ғоятӣ худруаст
بهار گلشن علمت به غایتی خودروست
Ки бар гулаш нанашаста сети шабнами таълим
که بر گلش ننشستهست شبنم تعلیم
Ба ҷилваи гоҳи матолиби басо ки тофта Эй
به جلوهگاه مطالب بسا که تافتهای
Ба қӯти назарии дасти ҷуръати тўҳим
به قوّت نظری دست جرأت توهیم
Ба поймардии табъ ту мекунад эҳсос
به پایمردی طبع تو میکند احساس
Натиҷа дар раҳми хештани қиёси ақим
نتیجه در رحم خویشتن قیاس عقیم
Ба дашти шубҳа агар сад ҳазор раҳи тозӣ
به دشت شبهه اگر صد هزار ره تازی
Наёядат сари хорӣ ба пои табъи салим
نیایدت سر خاری به پای طبع سلیم
Хдоигонои давр аз дарат чунон хаҷалам
خدایگانا دور از درت چنان خجلم
Ки сари зи зер ба боло намекунам чун ҷим
که سر ز زیر به بالا نمیکنم چون جیم
Ҷаҳон ба ҳавсилаам танг шуд чунонкии буриш
جهان به حوصلهام تنگ شد چنانکه برش
Ба вусъ , минтақа аъзамаст ҳалқа мем
به وسع، منطقة اعظم است حلقة میم
Ба ҳеҷ ром нагардад , ба ҳеҷ Ром накунад
به هیچ رام نگردد، به هیچ رم نکند
зи гулистон ба ғарибӣ фитодааст насим
ز گلستان به غریبی فتاده است نسیم
Бидӯни изн агар рафтам аз дарат на аҷаб
بدون اذن اگر رفتم از درت نه عجب
Ба ихтиёр нагардад ҷудои зи нофаи шамем
به اختیار نگردد جدا ز نافه شمیم
Ба ихтиёри ҳам аз ҷурм карда ам бипазир
به اختیار هم از جرم کردهام بپذیر
Ки такя дошт умедам ба дӯши лутфи ъмим
که تکیه داشت امیدم به دوش لطف عمیم
Ҳамон зи халқи худ ин интиқоми каш ки туро
همان ز خلق خود این انتقام کش که ترا
Гуноҳи ҷумла ба гардани гирифтаи халқи азим
گناه جمله به گردن گرفته خلق عظیم
Марои дуои ту аз узри ҷурми фарз тар аст
مرا دعای تو از عذر جرم فرضتر است
Касе з хеш нагӯяд ба боргоҳи Карим
کسی ز خویش نگوید به بارگاه کریم
Ҳамеша то ба умедаст бози чашми ниёз
همیشه تا به امیدست باز چشم نیاز
Ҳамеша то даҳани ҳирси мехи дуз аз бим
همیشه تا دهن حرص میخ دوز از بیم
Умеди дӯст ба лутфи ту чашми равшани бод
امید دوست به لطف تو چشم روشن باد
Чунонкии тираи дил аз бими тести хасми лӣим
چنانکه تیره دل از بیم تست خصم لئیم