То шафиъ хеш кардам соҳиби миъроҷ ро

تا شفیع خویش کردم صاحب معراج را

Сар ба истиғно баровардам дили муҳтоҷ ро

سر به استغنا برآوردم دل محتاج را

Ман мурӣди ҳиммати перӣ ки аз афтодагӣ

من مرید همّت پیری که از افتادگی

Пояҳо афзуд бар болои ҳам миъроҷ ро

پایه‌ها افزود بر بالای هم معراج را

Хоки фақрам маснадасту доғи ишқам афсар аст

خاک فقرم مسند است و داغ عشقم افسر است

Пушти поегар занам саҳласт тахту тоҷ ро

پشت پایی گر زنم سهل است تخت و تاج را

То қимори ишқи тарки мосўо варзида ам

تا قمارِ عشقِ ترک ماسوا ورزیده‌ام

Кофарамгар дар ҳисоб овардаам лилоҷ ро

کافرم گر در حساب آورده‌ام لیلاج را

Гарчи даврам дар назаргоҳи сари тири туам

گرچه دورم در نظرگاهِ‌ سر تیر توام

Шасти пурзӯри ту майдон дор кард омоҷ ро

شست پرزور تو میدان‌دار کرد آماج را

Бениёзиҳои гӯши лутф , шеван душман аст

بی‌نیازی‌های گوش لطف، شیون دشمن است

Хуш ба ноз аз нола мо месетанд боҷ ро

خوش به ناز از نالة ما می‌ستاند باج را

Шаби ндидстӣ ки ҳар ҷои каши туе ҷуз рӯз нест

شب ندیدستی که هر جا کش‌ تویی جز روز نیست

То бадонеи ҳоли шабҳои сиёҳи доҷ ро

تا بدانی حال شب‌های سیاه داج را

То кафи хоки қаноат хӯрдаам файёзи вор

تا کف خاک قناعت خورده‌ام فیّاض‌وار

Сайр ҳоҷат кардаам чун хеши сад муҳтоҷ ро

سیر حاجت کرده‌ام چون خویش صد محتاج را