Ғунчаро давр аз лаби лаълати дил аз гулшан гирифт

تا گریبان من اینک گرد دامانم گرفت

Бе рахти гул , гӯна аз рухсори зард ман гирифт

خاک دامنگیر غم آخر گریبانم گرفت

Кошкӣ як лаҳзаи савдоӣ маро кардӣ алоҷ

شهسوار غم که جز من مرد میدانی نداشت

Онкӣ аз бодоми чашмами солҳо равған гирифт

در کمینم کرد تا آخر به میدانم گرفت

Чеҳра дар хӯни шаст ӯ ҳам гарчи хӯн ман бирехт

من که جنگ روبرو با عشق کردم سال‌ها

Теғи бедод туро дидӣ ки хӯн ман гирифт ?

من نمی‌دانم چه کرد آخر که پنهانم گرفت

Май ниҳодами сар ба саҳрои мавҷи ашкам по бибаст

من شراری را به دامن تیز می‌کردم کزو

намешудам беруни зи олам гиряам доман гирифт

شعله‌ای در دامنم افتاد و در جانم گرفت

Абрӯаш аз куштанати файёзи шаккӣ турфа дошт

گفتی ای فیّاض دل را چون گرفت آن مه ز تو؟

Оқибати хӯни турои теғ ки дар гардан гирифт ?

چون گرفتن را نمی‌دانم!‌ ولی دانم گرفت