Бибаред зулф гарчи ба пои ту сари ниҳод
مکن دراز به زیر سپهر پا گستاخ
Сари бохт ҳар ки аз ҳади худ по ба дар ниҳод
که کردهاند برای کسی بلند این کاخ
Беҷурм агар задӣ сари зулф эътироз нест
عجب که کام خود از آسمان توانی دید
Ҳар кас ки гашти ошиқ рӯй ту сари ниҳод
که کوته است ترا دست و میوه بر سر شاخ
Чашм аз рухи ту брнтўоними доштан
اثر ندارد هر چند گوش گردون را
Зулфи каҷи ту банд ба пои назари ниҳод
به دست ناله دریدیم پردههای صماخ
Чандон ки норсост , ба дилҳо рсотрст
سرایتی به دل نازک تو نتواند
Дар сайди дили каманди ту расм дигар ниҳод
اگر چه گریة من سنگ میکند سوراخ
Файёз мушкиласт ки аз сар ба дар равад
گلوی شیشة قسمت چو تنگ شد فیّاض
Ин одии бадӣ ки туро ҳаст дар ниҳод
چه نفع دارد اگر دامن خم است فراخ