Ки метавонад аз пеш ёр бархезад ?
شب از هجر رخت صد غم در غمخانة ما زد
Нишастаем ки аз мо ғубор бархезад
نوای جغد آتش بیتو در ویرانة ما زد
Ба изтирор супурдем хешро дар ишқ
چنان در قتل ما بازار رشک دلبران شد گرم
Бигӯ зи маҷлиси мо ихтиёр бархезад
که خود را شعله بیتابانه بر پروانة ما زد
Дамӣ ки серумаи хаташ наме кашам дар чашм
دل از یاد لب لعلش به خون شعله میغلتد
зи дидаи ҷои нигоҳам ғубор бархезад
چه میبود اینکه آتش در دل پیمانة ما زد
Ҳалоки тарбият маҷлисӣ шавам ки дар он
نبود از نوبهار گریة ما هیچ تقصیری
Хазон агар биншинад баҳор бархезад
که برق آفتی پیدا شد و بر دانة ما زد
Насиби заврақи файёзи боди тӯфонӣ
چو عرض درد دل کردیم فیّاض از حیا پیشش
Ки мавҷи сад хатараш аз канор бархезад
لبش صد خنده بر تقریر بیتابانة ما زد