Иқбол рӯ намӯд ва ба мо ёр ёр шуд

آیینه سنگ بود ترا دید و آب شد

Венаи рӯзгори тираи мо рӯзгор шуд

آنگاه از فروغ رخت آفتاب شد

Паймони ношикастаи мо бо ту тозаи гашт

روز ازل ز شعلة حسن تو یک شرار

Аҳд набаста ту ба мо устувор шуд

بر آسمان شد و لقبش آفتاب شد

Бо донаҳои ҷавҳари теғи ту дил хуш аст

نرگس شنید تا ابدش دیده باز ماند

Ин обу донаи мурғи маро созгор шуд

چشمت که از فسانة من نیمخواب شد

Гулгунае барои арӯс хазон намонад

ای دل به حفظ ظاهر ازین بیشتر بکوش

Рангӣ ки дошт гули ҳамаи сарф баҳор шуд

حسنی که نیست هم همه صرف نقاب شد

Файёзро навиди висоли ту зинда кард

فیّاض یک نظر که فکندی به دفترم

Чашмӣ ки ҳам надошт барои ту чор шуд

دیوان شعر من همگی انتخاب شد