Вафодорӣ аз он тарки шикор афкан наме ояд

چو رشک رخنه‌گرِ نام و ننگ می‌آید

Азуи сад шева меояд вале ин фан наме ояд

قبا ز پیرهن او به تنگ می‌آید

Баҳории ин чунин ва дар қафаси ман бехабар аз гул

به کاوش مژه کوه غمی ز جا کندم

Ба бахти ман сабои ҳам гоҳе аз гулшан наме ояд

که پای تیشه در آنجا به سنگ می‌آید

Ба он дили обрӯии нолаҳо барадам чаҳ донистам

مرا چنین که به جان باختن شتابی هست

Ки нохунгирӣ аз мумаст аз оҳан наме ояд

چرا به قتل من او را درنگ می‌آید!

Чаҳ шуд умрӣаст каз таҳрики мавҷи гиряи хунин

چه غم ز تلخی ایّام غم مرا که مدام

Муҳӣтами шаб ба тўФи давра доман наме ояд

شکر ز مصر لبت تنگ تنگ می‌آید

Вафодорӣ аз он бдхўи таманнои доштами умрӣ

دلم ز یاد رخ او شکفته شد فیّاض

Чаҳ донистам ки кори дӯст аз душман наме ояд

ز عکس بر رخ آیینه رنگ می‌آید