Бе тапиши ором кӣ бошад дили зори маро

چو کرد خاک ره یار روزگار مرا

Завқ ҷустан зинда дорад набзи бемори маро

به چشم عالمیان داد اعتبار مرا

Ман куҷо ва ин қадари тоби тазалзулҳои ишқ

دماغ بوی گل و برگ گلستانم نیست

Атса гул мекунад ашФтаҳи дастори маро

مگر به باغ برد نالة هزار مرا

Шикваи нозкдлон аз барги гул нозук тараст

به کف نه جام میی، در نظر نه روی مهی

наме тавон дар як нафас тай кард тӯмори маро

گلی شکفته نگردید ازین بهار مرا

Кардаам кӯтаҳ ба худ роҳи дарози орзӯ

ز طرز دیدن پنهانت این چنین پیداست

Як гиреҳи дарҳами навардади риштаи кори маро

که راز دل زتو خواهد شد آشکار مرا

Нағма рӯҳонӣаст зоҳиди пунбае дар гӯш на

مرا ز گردش چشم تو حال می‌گردد

Бӯ ки битавонӣ шунидани нолаи зори маро

به گردش مه و مهر فلک چه کار مرا؟

Гулбунамро ноумедӣ аз баҳор файз нест

ز نارسایی اقبالم ای فلک خوش باش

Як гулистони гул дар оғӯшаст ҳар хори маро

به دامنی نرسم گر کنی غبار مرا

Дар фурӯғи офтоби ишқ манзил карда ам

چنین که زار و ضعیفم ز هجر او فیّاض

Нест дасти сояи домани гири девори маро

مگر صبا برساند به کوی یار مرا