То кӣ даруни синаи нигаҳдорами оҳ ро
تا کی درون سینه نگهدارم آه را
Рафтам сияҳ кунам рухи хуршеду моҳ ро
رفتم سیه کنم رخ خورشید و ماه را
То кӣ сипаҳ ба душманӣ мо кашад сипеҳр
تا کی سپه به دشمنی ما کشد سپهر
эй нола ҷамъ кун сипаҳи ашку оҳ ро
ای ناله جمع کن سپه اشک و آه را
То кӣ фалаки бибандади роҳи гурези мо
تا کی فلک ببندد راه گریز ما
Мо ҳам бзўр гиря бабандем роҳ ро
ما هم بزور گریه ببندیم راه را
Аз якдигар наме гусалади мавҷи мотамам
از یکدیگر نمیگسلد موج ماتمم
Сад кӯҳ бастааст ба пои барги коҳ ро
صد کوه بسته است به پا برگ کاه را
Шуд вақти онкӣ чун мижа аз нави мусӣбатӣ
شد وقت آنکه چون مژه از نو مصیبتی
Дар кисват азо бинишонам нигоҳ ро
در کسوت عزا بنشانم نگاه را
Рӯзам ки бади сиёҳ кунун тоза карда аст
روزم که بد سیاه کنون تازه کرده است
Бар ман сиёҳтар шабу рӯзи сиёҳ ро
بر من سیاهتر شب و روز سیاه را
Саръи замонаро ки тавонад алоҷ кард
صرع زمانه را که تواند علاج کرد
Акнӯн ки баради ҳодисаи ҳикмати паноҳ ро
اکنون که برد حادثه حکمت پناه را
Ваа кони ҳзбри бешаи дарё дилӣ намонад
وه کان هزبر بیشة دریا دلی نماند
Он мирзои даҳри Муҳамад алӣ намонад
آن میرزای دهر محمّد علی نماند
Бо офтоби меҳри Рахш буд панҷаи тоб
با آفتاب مهر رخش بود پنجهتاب
Гуфтӣ ба рӯй гули сухани талх чун гулоб
گفتی به روی گل سخن تلخ چون گلاب
Май хости зайнаби чамани хулд , рӯзгор
میخواست زینب چمن خلد، روزگار
Аз гулшани замона аз он кардаш интихоб
از گلشن زمانه از آن کردش انتخاب
Рафт аз сарои фонии сӯии сарои хулд
رفت از سرای فانی سوی سرای خلد
Шуд ҷониби зулоли азин манбаи сароб
شد جانب زلال ازین منبع سراب
Ин тангнои лаёқат мнзглҳш надошт
این تنگنا لیاقت منزگلهش نداشت
Зонрўи сӯии ҷаҳон дигар тохт аз шитоб
زانرو سوی جهان دگر تاخت از شتاب
Он навҷавони мардумӣ аз даҳр чун бирафт
آن نوجوان مردمی از دهر چون برفت
На дар ҷавонии об ва на дар мардумӣаст тоб
نه در جوانی آب و نه در مردمیست تاب
намемонад агар ду сол дигар бар сарири умр
میماند اگر دو سال دگر بر سریر عمر
намедидӣ одамӣ ки барояд броФтоб
میدیدی آدمی که برآید برآفتاب
Дар донишу камол ба ҳаддӣ ки бе назир
در دانش و کمال به حدیّ که بینظیر
Гуфтӣ саволи номдаҳ дар лафзро ҷавоб
گفتی سؤالِ نامده در لفظ را جواب
Бар ҳам зани замонау ошӯби шаҳр буд
بر هم زن زمانه و آشوب شهر بود
Шогирд ман набӯд ки устоди даҳр буд
شاگرد من نبود که استاد دهر بود
Афсӯси кони ягонаи азин хонаи рахти баст
افسوس کان یگانه ازین خانه رخت بست
Ин гўжпшти байн ки чаҳ сони пушти мо шикаст
این گوژپشت بین که چه سان پشت ما شکست
Сад ҳайф аз он Фтонт ва он фаҳм ва ( он ) зко
صد حیف از آن فطانت و آن فهم و (آن) ذکا
Афсӯс аз он латофати табъи баланди даст
افسوس از آن لطافت طبع بلند دست
Май буд агар ба давлат чанде дарин ҷаҳон
میبود اگر به دولت چندی درین جهان
намедидӣ одамӣ ба куҷо мекунад нишаст
میدیدی آدمی به کجا میکند نشست
Ҳушёри монда буд дарин базми биҳшон
هشیار مانده بود درین بزم بیهشان
Ҳамвори рафта буд дар ин раҳи баланду паст
هموار رفته بود در این ره بلند و پست
эй нури дидаи мау хуршед , бе ту нест
ای نور دیدة مه و خورشید، بی تو نیست
На меҳри рўзпрўр ва на моҳи шаби параст
نه مهر روزپرور و نه ماه شبپرست
Завқӣ намонад бе ту ҷаҳони хароб ро
ذوقی نماند بی تو جهان خراب را
Гӯи осмон сиёҳ кунад офтоб ро
گو آسمان سیاه کند آفتاب را
Рафтӣ ту лек номи накӯ ёдгор монад
رفتی تو لیک نام نکو یادگار ماند
Ҳарфтарат чу дидаи мо обдор монад
حرف ترت چو دیدة ما آبدار ماند
Рафтӣ ту аз миён ( ва ) дили сахти ҷони мо
رفتی تو از میان (و) دل سخت جان ما
Бар хоки марқади ту чу санг мазор монад
بر خاک مرقد تو چو سنگ مزار ماند
Будӣ сафои оинаи даҳр ва ман ғубор
بودی صفای آینة دهر و من غبار
Аз обгина рафт сафо ва ғубор монад
از آبگینه رفت صفا و غبار ماند
Дар боғ бе ҳузури ту як ғунчаи воншд
در باغ بیحضور تو یک غنچه وانشد
Ин уқдаи сахт дар дили танг баҳор монад
این عقده سخت در دل تنگ بهار ماند
намеронад рӯзгори Аннан бар Аннани ту
میراند روزگار عنان بر عنان تو
Охири ту пеши тохтӣ ва рӯзгор монад
آخر تو پیش تاختی و روزگار ماند
Будӣ айёр нек наҳодӣ дарин ҷаҳон
بودی عیار نیکنهادی درین جهان
Рафтӣу нақди неки вшӣ беайёр монад
رفتی و نقد نیکوشی بیعیار ماند
Будӣ гули канори муҳибону дӯстон
بودی گل کنار محبّان و دوستان
Рафтӣу хӯни дида чу гул дар канор монад
رفتی و خون دیده چو گل در کنار ماند
Мо бе ту дӯстони ҳамаи худро таба кунем
ما بیتو دوستان همه خود را تبه کنیم
То рӯзгори хеш ба мотам сияҳ кунем
تا روزگار خویش به ماتم سیه کنیم
Рӯзӣ ки мешуд ту куҷо будам оҳи ман
روزی که میشد تو کجا بودم آه من
Каз пардаҳои чашм туро кардамӣ кафан
کز پردههای چشم ترا کردمی کفن
Ту будӣ ва набӯд маро рӯй рӯзгор
تو بودی و نبود مرا روی روزگار
Ман зинда дар ҷаҳон ва набошӣ ту ! вои ман
من زنده در جهان و نباشی تو! وای من
Ҷузи ман ки зинда мурда шудам дар фироқи ту
جز من که زنده مرده شدم در فراق تو
Дар зиндагии надида касе марги хештан
در زندگی ندیده کسی مرگ خویشتن
Дар боғи даҳр то ту чу гули рехтӣ ба хок
در باغ دهر تا تو چو گل ریختی به خاک
Чун ғунча бо ҳазор забон дӯхтам даҳан
چون غنچه با هزار زبان دوختم دهن
То рафтае зи силсилаи аҳли илм , чарх
تا رفتهای ز سلسلة اهل علم، چرخ
Кард аз саводи лафзи сияҳ , хонаи сухан
کرد از سواد لفظ سیه، خانة سخن
Гул аз фироқ рӯй ту чун хор бар дарахт
گل از فراق روی تو چون خار بر درخت
Сарв аз мусӣбати ту фурӯ рафт дар чаман
سرو از مصیبت تو فرو رفت در چمن
Булбули зи фурқати гул рӯй ту нолаи соз
بلبل ز فرقت گل روی تو نالهساز
Дар ҳиҷри сарви қад ту қамарӣаст нағмаи зан
در هجر سرو قد تو قمریست نغمهزن
Дар ҳиҷр рӯй маҳвашат эй сарви бӯстон
در هجر روی مهوشت ای سرو بوستان
На душманон гузоштае ва на дӯстон
نه دشمنان گذاشتهای و نه دوستان