Пештари зон ки маии ҷилва дар ин маҳфил дошт

پیشتر زآن که مهی جلوه در این محفل داشت

Муҳраи меҳри ту дар ҳуққаи дил манзил дошт

مهرهٔ مهر تو در حقهٔ دل منزل داشت

Ман ҳамин аз назари афтода чашмат будам

من همین از نظر افتاده چشمت بودم

Вар на сад масъала бо мардуми соҳиб дил дошт

ور نه صد مساله با مردم صاحب دل داشت

Дӯш бо сарви ҳадиси ғам худ ме гуфтам

دوش با سرو حدیث غم خود می‌گفتم

Кови ҳам аз қади ту хӯн дар дилу по дар гул дошт

کاو هم از قد تو خون در دل و پا در گل داشت

Хӯни баҳоии дилам аз чашм ту натавонам хост

خون بهای دلم از چشم تو نتوانم خواست

Ки ба як ғамзаи ду сад ғарқа ба хӯн бсмл дошт

که به یک غمزهٔ دو صد غرقه به خون بسمل داشت

Ҳар танӣ дар талабати лоиқи ҷон додан нест

هر تنی در طلبت لایق جان دادن نیست

Неки бахти он ки тани поку дил қобил дошт

نیک بخت آن که تن پاک و دل قابل داشت

Холи ҳиндӯии ту бар оташи оризи шабу рӯз

خال هندوی تو بر آتش عارض شب و روز

Паии эҳзори дили сӯхтагон филфил дошт

پی احضار دل سوختگان فلفل داشت

Дар раҳи ишқи марои ҳасрати мақтӯлии кишт

در ره عشق مرا حسرت مقتولی کشت

Ки нигоҳии гуҳи куштан ба рух қотил дошт

که نگاهی گه کشتن به رخ قاتل داشت

Сохт фориғи зи ғами рафтау ояндаи маро

ساخت فارغ ز غم رفته و آینده مرا

Ваа ки соқии хабар аз мозӣ ва мстқбл дошт

وه که ساقی خبر از ماضی و مستقبل داشت

Бо ҳамаи нохушии ишқи фурӯғии хуш буд

با همه ناخوشی عشق فروغی خوش بود

Шодкоми он ки ғам рӯй туро ҳосил дошт

شادکام آن که غم روی ترا حاصل داشت