Машшота то ба рӯй ту зулфи дўтои ниҳод
مشاطه تا به روی تو زلف دوتا نهاد
Баси мурғи дил ки пой ба доми балои ниҳод
بس مرغ دل که پای به دام بلا نهاد
Бе чун агар гуноҳи шуморади нигоҳ ро
بی چون اگر گناه شمارد نگاه را
Пас дар рухи ту ин ҳамаи хӯбӣ чаро ниҳод
پس در رخ تو این همه خوبی چرا نهاد
Нўшинии лабати зи зулмати хати гашти ошкор
نوشینی لبت ز ظلمت خط گشت آشکار
Хизраши лақаб ба чашмаи оби бақои ниҳод
خضرش لقب به چشمهٔ آب بقا نهاد
Аз ҷон бурид ҳар ки ба зулфат кашид даст
از جان برید هر که به زلفت کشید دست
Вази сари гузашти он ки дар ин ҳалқаи пои ниҳод
وز سر گذشت آن که در این حلقه پا نهاد
То дод коми хотири бегонаи лаъли ту
تا داد کام خاطر بیگانه لعل تو
Сад доғи рашк бар ҷигари ошнои ниҳод
صد داغ رشک بر جگر آشنا نهاد
Ҳар кас ки хост зон лаби ширини муроди дил
هر کس که خواست زان لب شیرین مراد دل
Ҷони азиз бар сари ин муддаои ниҳод
جان عزیز بر سر این مدعا نهاد
То аз вафоӣ хеш надидем ҳеҷ хайр
تا از وفای خویش ندیدیم هیچ خیر
Хайраш мабод он ки баннои вафои ниҳод
خیرش مباد آن که بنای وفا نهاد
То орзӯӣ дидан ӯро барам ба хок
تا آرزوی دیدن او را برم به خاک
Теғи ҷафо ба гардани ман аз қафои ниҳод
تیغ جفا به گردن من از قفا نهاد
То буи ӯ ба мо нарасонад зи тоби зулф
تا بوی او به ما نرساند ز تاب زلف
Чандини ҳазор банд ба пои сабои ниҳод
چندین هزار بند به پای صبا نهاد
Рӯзӣ ки дар ҷаҳони ғаму шодии ниҳоди пой
روزی که در جهان غم و شادی نهاد پای
Шодӣ ба сӯй ӯ шуду ғами рӯ ба мо ниҳод
شادی به سوی او شد و غم رو به ما نهاد
Охири фурӯғӣ аз ситами посбон ӯ
آخر فروغی از ستم پاسبان او
Зон хок остон шуду дилро ба ҷои ниҳод
زان خاک آستان شد و دل را به جا نهاد