Магари худои зи рақибони туро ҷудои бикунад
مگر خدا ز رقیبان تو را جدا بکند
Аҷаби хаёл хушӣ кардаам , худои бикунад
عجب خیال خوشی کردهام، خدا بکند
Сазои мардуми бегонаро даҳуми рӯзӣ
سزای مردم بیگانه را دهم روزی
Ки рӯзгори туро бо ман ошнои бикунад
که روزگار تو را با من آشنا بکند
Хабар наме шӯй аз сӯзи мо магар вақте
خبر نمیشوی از سوز ما مگر وقتی
Ки оҳи сӯхтагон дар дили ту ҷои бикунад
که آه سوختگان در دل تو جا بکند
Бар он серум ки ҷафои туро ба ҷони бихарам
بر آن سرم که جفای تو را به جان بخرم
Дар ин муомилагар умри ман вафои бикунад
در این معامله گر عمر من وفا بکند
Қабули ҳазрати соҳиб дилон нахоҳад шуд
قبول حضرت صاحب دلان نخواهد شد
Агар ба дарди ту дили хоҳиши давои бикунад
اگر به درد تو دل خواهش دوا بکند
Писанди хоҷаи мо ҳеҷ банда Эй нашавад
پسند خواجه ما هیچ بندهای نشود
Ки қасди бандагӣ аз баҳри муддаои бикунад
که قصد بندگی از بهر مدعا بکند
Тариқи ошиқӣу расми дилбарӣ ин аст
طریق عاشقی و رسم دلبری این است
Ки мо вафо бинмоӣем ва ӯ ҷафои бикунад
که ما وفا بنماییم و او جفا بکند
Камоли бандагӣу айни хоҷагӣ ин аст
کمال بندگی و عین خواجگی این است
Ки мо хато бинмоӣем ва ӯ атои бикунад
که ما خطا بنماییم و او عطا بکند
Надонам ин дили сдпораҳро чаҳ чора кунам
ندانم این دل صدپاره را چه چاره کنم
Худо накарда агар тир ӯ хатои бикунад
خدا نکرده اگر تیر او خطا بکند
Ба ёди зулфу биногваш ӯ дилам то чанд
به یاد زلف و بناگوش او دلم تا چند
Шаб дароз бинолад , саҳари дуои бикунад
شب دراز بنالد، سحر دعا بکند
Фурӯғӣ аз паии он нозанин ғизол бирав
فروغی از پی آن نازنین غزال برو
Ки дар қаламрави ишқати ғазали сарои бикунад
که در قلمرو عشقت غزل سرا بکند